4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
किया गया है उसे फ्एक अनोखी घटनाय् क्यों कहा। परंतु जो लोग इससे पहले की घटनाओं से परिचित हैं वे इसे अनुचित विवरण नहीं समझेंगे। यह कई कारणों से अनोखी घटना है।
अधिवेशन की अध्यक्षा पहले तो श्रीमती एनी बेसेंट थीं। वह अपने अनेक ऐसे कार्यों के कारण जनता में लोकप्रिय थीं जिसके लिए भारत के भावी इतिहासकार उन्हें सदा याद रखेंगे। वह फ्थियासोफिकल सोसायटीय् की संस्थापक थीं जिसका मुख्यालय अडयार में है। श्रीमती एनी बेसेंट भूतपूर्व ब्राह्मण रजिस्ट्रार के पुत्र श्री कृष्णामूर्ति को भावी नेता के रूप में ऊंचा उठाने के लिए प्रसिद्ध थीं। श्रीमती ऐनी बेसेंट फ्होमरूल लीगय् की संस्थापक के रूप में जानी जाती थीं। श्रीमती एनी बेसेंट को ऐसे अनेक कार्यों के लिए उनके मित्र भले ही उनकी प्रशंसा करें, परंतु वह कभी भी अस्पृश्यों की हमदर्द रही हों, ऐसा मैं नहीं मानता। जहां तक मुझे ज्ञात है वह अस्पृश्यों के प्रति प्रतिकूल धारणा रखती थीं। फरवरी 1909 के फ्इंडियन रिव्यूय् में फ्दी अपलिफट ऑफ दी डिप्रेस्ड क्लासेजय् शीर्षक से प्रकाशित लेख जिसमें अस्पृश्यों के बच्चों को सार्वजनिक स्कूलों में प्रवेश मिलना चाहिए अथवा नहीं, इस विषय पर अपने विचार प्रकट करते हुए श्रीमती ऐनी बेसेंट ने कहा µ
फ्हमने प्रत्येक राष्ट्र में ऊंच-नीच का सामाजिक आधार देखा है। समाज का
एक बड़ा वर्ग अज्ञानी, अपमानित, अशिष्ठ है जो ऐसे काम करता है, जिसकी
समाज को जरूरत है, परंतु उसी समाज द्वारा उन्हें तिरस्कृत एवं बहिष्कृत
किया जाता है जिसकी आवश्यकताओं की वे पूर्ति करते हैं। इंग्लैंड में भी
एक ऐसा समाज है जिसे फ्सबमर्जड टेंथय् कहते हैं जो वहां की जनसंख्या
का दसवां भाग है। उन्हें भरपेट भोजन नहीं मिलता, वे कुपोषण के शिकार
हैं और उन्हें बीमारी घेरे रहती है। वे रोग उन्हीं विषमाताओं से पैदा होते हैं।
ये अन्य जीव जंतुओं के समान अल्पबुद्धि के होते हैं। कुपोषण के कारण
उनके बच्चे अकाल मौत मरते हैं। उन्हें सूखे जैसे रोग हो जाते हैं। उनमें जो
कुछ ठीक-ठाक सुडौल होते हैं वे घृणित कार्य करते हैं जैसे भंगी का काम,
झाडू लगाना, बेलदारी का काम, बंदरगाहों पर मजदूरी, ठेले खींचना। वे मजदूर
बनते हैं और वे समाज में बहुत निम्न स्तर के होते हैं, जैसे शराबी, लुच्चे,
लोफर, लफंगे, टुच्चे, मंगते, भीख मांगने वाले, जघन्य अपराधी और आततायी
लुटेरे। पहले प्रकार के व्यक्ति ईमानदार और मेहनती होते हैं तथा दूसरे प्रकार
के लोगों को जबरदस्ती अपनी रोटी कमाने के लिए श्रम करने पर विवश
किया जाता है। भारत में ऐसे ही वर्ग की संख्या कुछ जनसंख्या का छठा