1. अनोखी घटना - Page 20

अनोखी घटना

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भाग है और उनका जातीय नाम फ्दलित वर्गय् है। इस समाज का निर्माण इस देश के उन प्राचीन निवासियों से हुआ है जिन्हें आर्य आक्रमणकारियों ने उन पर आक्रमण कर गुलाम बनाया। यह वर्ग शराबी, कबाबी और निहायत गंदा रहता है तथा उसका स्वच्छता से चाहे वह खाने की हो या रहन-सहन की हो, कोई सरोकार नहीं रहता। उनके यहां केवल विवाह में ही कुछ रीति-रिवाज़ होते हैं। बच्चों के साथ ठीक व्यवहार किया जाता है। उनमें कू्ररता, हिंसा और अपराध बहुत ही कम होते हैं। अपराधी समुदाय के लोग जैसे वंशानुगत चोर, डकैत इनसे अलग रहते हैं और झाडू लगाने वाली भंगी जैसी जातियों के साथ वे नहीं मिलते। काश्तकार और कारीगर भी दलित वर्ग के होते हैं। वे विनम्र, समर्पित, परिश्रमी, दयालु और संतोषी होते हैं। बहुत कम में संतोष कर फ्आनंदय् से रहते हैं। सामान्यतः कम बद्धिमान होते हैं। नागरिकोचित मूल्यों का उनमें पूरी तरह अभाव हो, ऐसी बात भी नहीं। वे सहिष्णु और दयालु तथा स्वभाव के धार्मिक होते हैं। वास्तव में वे सभ्य समाज के लिए बड़े लाभप्रद हैं।

फ्ऐसे लोगों के लिए जो दलितों पर होने वाले अमानुषिक अत्याचार एवं कू्रर व्यवहार को महसूस करते हैं, जो यह महसूस करते हैं कि उन भारतीयों के लिए क्या किया जा सकता है जो स्वतंत्रता की मांग करते हैं और चाहते हैं कि दूसरों को भी आदर देना चाहिए तथा स्वतंत्रता का भागीदार बनाना चाहिए।

फ्शिक्षा ही दलितों के उत्थान का एकमात्र उपाय है परंतु बुनियादी कठिनाई यह है कि समाज के जिस वर्ग के लिए मांगें की जाती हैं और जिसकी हालत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई जाती है, समाज के उसी सबसे निचले, अस्पृश्य वर्ग के बच्चों को स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया जाता। जहां कहीं दिया भी जाता है तो उनमें तथा सवर्ण बच्चों में बराबरी और मेलजोल का दर्जा नहीं होता। अतः यह पूछना आवश्यक हो जाता है कि क्या भाईचारे का अर्थ किसी वर्ग के स्तर को घटाना है? किसी भी परिवार में बड़े बच्चों और छोटे बच्चें के साथ समान व्यवहार किया जाता है। ज्ञान एवं प्रकृति के अनुसार नहीं अब से जो सम बंधुत्व को बदलेगा और सुसंस्कृत वर्ग से मांग करेगा कि बनावटी समानता स्थापित करने के लिए पीढि़यों से प्राप्त किए जाने वाली शिक्षा के फलों का त्याग करना पड़ेगा क्योंकि यह भावी उन्नति में बाधक सिद्ध होगी जैसे इस समय भी निरर्थक