7. झूठा आरोप - Page 199

184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इन्कार करके पैदा किया है कि सांप्रदायिक बहुमत के रहते राजनीतिक लोकतंत्र के लिए भारी खतरा पैदा हो जाएगा जबकि अस्पृश्यों का मत इसके विपरीत है और वे जोर देकर कहते हैं कि इस खतरे को दूर करने के लिए संविधान में ऐसी कारगर व्यवस्था की जानी चाहिए। दूसरे शब्दों में, अस्पृश्य भारत को लोकतंत्र के योग्य बनाने के उत्सुक हैं जबकि कांग्रेस भले ही लोकतंत्र के विरुद्ध न हो, परंतु वह उन परिस्थितियों के विरुद्ध है, जिनसे वास्तविक प्रजातंत्र बन पाएगा।

दूसरी बात यह है कि विदेशी को यह देखने को मिलेगा कि अस्पृश्यों की संरक्षणों की यह मांग कोई नई मांग नहीं है। यदि वह संरक्षणों को निगरानी मानकर चले तो उसे समझने में और भी आसानी होगी। राजनीतिक प्रजातंत्र को विनाश से बचाने के लिए कोई ऐसा संविधान नहीं है, जिसमें निगरानी रखने का प्रावधान न किया गया हो, जैसा कि अमरीका के संविधान में मौलिक अधिकारों और अधिकार के विभाजन पर है। यह विदेशी इस सिद्धांत से सहमत हो जाता है तो उसे इसे समझने में कोई कठिनाई नहीं होगी, कि अस्पृश्यों द्वारा मांगे गए संरक्षण वैसे ही हैं, जैसे कि दूसरे देशों में हैं। अंतर केवल दोनों के स्वरूप का है। क्योंकि राजनीतिक प्रजातंत्र के लिए

खतरा पैदा करने वाली शक्तियों का स्वरूप संरक्षणों के स्वरूप से भिन्न हो सकता है जैसे कि भारत में है। यहां इन शक्तियों का स्वरूप भिन्न है और इसलिए संरक्षणों का भी भिन्न रूप होना आवश्यक है।

तीसरी बात यह है कि विदेशी को यह समझने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए कि यदि कोई दल सांप्रदायिक है तो वह है कांग्रेस, न कि अस्पृश्य। कांग्रेस चाहे जो दार्शनिक आदर्श प्रस्तुत करे, कांग्रेस द्वारा संवैधानिक गारंटी की मांग का विरोध करने में उसका वास्तविक उद्देश्य यही है कि वह राजनीतिक क्षेत्र में बहुसंख्यक हिंदू संप्रदाय को स्वतंत्रतापूर्वक विचरण करने देना चाहती है। उस विदेशी को यह भी समझ में आ जाएगा कि यद्यपि कांग्रेस खुलकर ऐसी बातें नहीं कहती तब भी कांग्रेस कितनी सांप्रदायिक है। बहुसंख्यक हिंदू समुदाय कांग्रेस का मेरूदंड है। यह संस्था हिंदुओं से बनी है और उसका पोषण हिंदुओं द्वारा ही किया जाता है। इस संस्था के अधिकांश सदस्य हिन्दू हैं और उनेक अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इससे यह आसानी से समझ में आ जाएगा कि अस्पृश्यों के अधिकारों के संरक्षण की मांग का विरोध कांग्रेस राष्ट्रीयता के नाम पर करके अपने तर्कों को लोगों को कैसे-कैसे भ्रमित करती है। दूसरी बात यह भी समझ में आ जाएगी कि कांग्रेस राष्ट्रीयता के बहाने दुनिया को धोखा दे रही है ताकि उसे सांप्रदायिकता की मनमानी करने की पूरी स्वतंत्रता मिल सके।

अंत में, उस विदेशी को यह भी ज्ञात हो जाएगा कि भारतीय राजनीति में कांग्रेस का प्रतिनिधिक स्वरूप उतने महत्व का मुद्दा कैसे बन गया है। उसे पता चल जाएगा