186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अमरीका का है, जहां गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद नीग्रो लोगों के साथ विश्वासघात किया गया। उस गृहयुद्ध में नीग्रो लोगों ने जो भूमिका निभाई थी, उसके विषय में श्री हरबर्ट अपथेकर ने लिखा है ख्1, ःµ
फ्संघीय सेना में गुलाम राज्यों से 12 लाख पचास हजार नीग्रों लोगों ने
सेवा की। वे उत्तर के अस्सी हजार के साथ साढ़े चार सौ लड़ाइयों में बड़े
उत्साह और साहस के साथ लड़े और गुलामी का जुआ उतारने में महत्वपूर्ण
योगदान किया।य्
फ्दो लाख नीग्रो सैनिक बड़ी लगन और सत्यनिष्ठा के साथ लड़ रहे थे।
परंतु फिर भी उन्हें नीच और गुलामी के काबिल ही समझा गया।य्
फ्और गणराज्य के नीग्रो लोगों ने शर्मनाक भेदभाव और प्रतिकूल
परिस्थितियों के बावजूद लड़ाई लड़ी। गोरे सैनिक 13 डॉलर प्रतिमाह पाते
थे, तो नीग्रो सैनिक मात्र सात डॉलर। 14 जुलाई, 1864 तक, जब वेतन
1 जनवरी 1864 से बराबर कर दिया गया, गोरे रंगरूटों को पारितोषिक रूप
में सूचीबद्ध किया गया था, परंतु नीग्रो लोगों को नहीं। (15 जून, 1864
तक), यही नहीं नीग्रो के लिए कमीशंड ऑफिसर के रैंक तक उन्नति पाने
की कोई संभावनाएं नहीं थीं। संघ (कन्फेड्रेसी) ने युद्ध में बंदी गनाए गए
नीग्रो सैनिकों को जो गुलाम थे कभी युद्ध-बंदियों के रूप में मान्यता नहीं दी
तथा युद्ध के बंदी आजाद नीग्रो को अक्तूबर 1864 तक युद्ध के बंदी का
दर्जा नहीं दिया गया। नीग्रो या तो मारे गए या दासता में फिर जकड़ लिए गए
अथवा उन्हें कठिन परिश्रम करने के लिए कारागार में डाल दिया गया।
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फ्हजारों नीग्रो लोगों को, जो अभी तक गुलाम थे और जिन पर जुल्म
सितम होते रहते थे, हथियार दिए गए और उन्हें अपने देशों को भेज दिया
गया ताकि वे वहां पर अपनी रक्षा कर सकें और इंसानों की तरह ही रह
सकें तथा वे अपने साथियों को आजाद कर सकें और अपने माता-पिता,
बच्चों और पत्नियों को स्वतंत्र कर सकें। यह बात सदैव याद रखी जाएगी
कि प्रजातंत्र की रक्षा के लिए 37000 नीग्रो सैनिकों ने कुर्बानी दी।य्
गृहयुद्ध समाप्त होने के बाद नीग्रो लोगों का क्या हुआ? विजय के पहले चरण में गणराज्य के लोग, जिन्होंने संघ की सुरक्षा के लिए नीग्रो लोगों की सहायता ली
- नीग्रो इन द सिविल वार, पृष्ठ 35µ40