7. झूठा आरोप - Page 202

झूठा आरोप

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थी, संविधान में तेरहवां संशोधन करने का प्रस्ताव लाए। उस संशोधन के अंतर्गत नीग्रो लोगों को कानूनन मुक्ति मिली। परंतु क्या नीग्रो लोगें को शासन में कोई अन्य अथवा मताधिकार प्रदान किए गए? दक्षिणी राज्यों को यह दिखाने के लिए कि नीग्रो लोगों को भी गोरे लोगों के समान ही राजनीतिक अधिकार हैं, गणराज्य के लोगों ने कदम उठाए। यह प्रयास संविधान में चौदहवें संशोधन द्वारा किया गया, जिसके अंतर्गत उन्हें नागरिकता प्रदान की गईं। समस्त राज्यों और संघ में नीग्रो लोगों सहित सभी को नागरिकता दे दी गई। विशेषाधिकारों और कानून की परिधियों से मुक्ति के अधिकारों के विरुद्ध कानून बना और राज्यों में कांग्रेस ने उन नागरिकों की जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व कम किया, जहां मताधिकार प्राप्ति सीमित थी। दक्षिणी राज्य 14वें संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। टेनेसी के अतिरिक्त सभी ने संशोधन अस्वीकार कर दिया ओर गोरों की सरकारें बनाई गईं। तब रिपब्लिकन लोगों ने आगे बढ़कर 2 मार्च, 1867 को कथित पुनर्निर्माण अधिनियम (बागी राज्यों के लिए सक्षम सरकार देने का विधेयक) पास करना चाहा, जिसका आशय उन सभी राज्यों को संघ में फिर शामिल करना था, जिन्हें उस समय तक संघ में शामिल नहीं माना गया था। (गोरे निवासियों द्वारा स्थापित सरकारों की उपेक्षा करते हुए और उन्हें दुबारा शामिल करने के लिए यथोचित शर्तों का निश्चय करना। इस अधिनियम के द्वारा उस समय वे राज्य अर्थात् टेनेसी के अतिरिक्त सभी विद्रोही दक्षिणी राज्य पांच सैनिक जिलों में बांट दिए गए और प्रत्येक जिला संघीय सेना के ब्रिगेडियर जनरल द्वारा उस समय तक शासित होता रहा, जब तक (1) राज्य एक नए संविधान का निर्माण नहीं कर लेता, (2) चौदहवें संशोधन की पुष्टि नहीं करता, और (3) राज्यों को विधिवत फिर शामिल नहीं कर लिया जाता। रिपब्लिकन लोगों द्वारा दूसरा संशोधन लाया गया, जिसे पन्द्रहवां संशोधन कहा जाता है। इसके अनुसार उन्हें वर्ण भेद अथवा पूर्व प्रचलित दासता और जाति-भेद बरतने के कारण मताधिकार से वंचित कर दिया गया था। वह संशोधन संविधान का एक भाग बना और सभी राज्यों को उसे मानना पड़ा। दक्षिणी राज्य के गोरे लोग नीग्रो लोगों को समान नागरिकता प्रदान नहीं करना चाहते थे। नीग्रो लोगों को मताधिकार से वंचित रखने का प्रश्न शीघ्रता से आगे बढ़ा। इसे दक्षिणी राज्य संस्कारों तथा वहां के श्वेत नागरिकों का परम कर्तव्य कहा गया। 15वें संशोधन को निरस्त करने के लिए राज्य सरकारों ने मताधिकार के ऐसे कानून बनाए, जिनसे नीग्रो लोगों को वोट देने के अधिकार से जातिभेद और रंगभेद के अतिरिक्त अन्य आधारों पर वंचित कर दिया जा सकता था। उनमें से बहुतों ने

  1. इसलिए कहा जाता है कि इससे उस मनुष्य के मताधिकार पर यह बंदिश लगा दी गई कि उसके

पितामह ने उस मताधिकार का उपयोग किया हो।