8. वास्तविक मुद्दा - Page 208

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अध्यायः 8

वास्तविक मुद्दा

क्या अस्पृश्य पृथक वर्ग नहीं है?

I

कांग्रेस और अस्पृश्यों के मध्य विवाद में मूल मुद्दा क्या है? जहां तक इस विषय में मेरी जानकारी है, मूल मुद्दा यह है कि भारत के राष्ट्रीय जीवन में अस्पृश्य पृथक वर्ग है अथवा नहीं।

इस विवाद का यही मूल प्रश्न है और इस आधार पर कांग्रेस और अस्पृश्य एक दूसरे के विरोधी पक्ष हैं। इस विषय में अस्पृश्यों का उत्तर हां में है। उनका कहना है कि वे हिंदुओं से बिल्कुल भिन्न हैं। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है फ्नहींय् और वह दृढ़तापूर्वक कहती है कि हिंदू समाज के ही अंग हैं। इस मूल प्रश्न पर दोनों पक्षों की अलग-अलग सोच है। इस विषय में ब्रिटिश सरकार का रुख लॉर्ड लिनलिथगो ने जो भारत के वायसराय और गवर्नर-जनरल थे अपनी घोषणा में बहुत ही स्पष्ट करते हुए कहा था कि भारत के राष्ट्रीय जीवन में अस्पृश्यों का बिल्कुल पृथक अस्तित्व है। ख्1, बहुत से लोग जो वैधानिक संरक्षणों को मूल प्रश्न मानते हैं, उन्हें यह जानकर आश्चर्य होगा कि वे उस प्रश्न को जैसा समझते हैं और जैसा मैं समझता हूं, उन दोनों विचारों में भेद है। वास्तव में ऊपर से कोई अंतर नहीं मालूम होता। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि कौन किसे प्रस्तावना और किसे उपसंहार मानता है। मैं इसे प्रस्तावना मानता हूं। जिसे मैंने मूल प्रश्न कहा है, उसे मैं उपसंहार कहता हूं, जो प्रस्तावना के बाद आता है। जैसा कि न्याय प्रक्रिया में तर्कों के बाद निष्कर्ष आता है। यह अधिक अच्छा होगा कि इस अंतर के विषय में मैं कुछ लिखूं। मुझे भारत के संविधान का विकास ऐसा लगता है, जैसे तर्क-वितर्क के बाद निष्कर्ष का अंश उभर कर सामने आया है, और निष्कर्ष वाक्य है, कि भारतीय राजनीति की

  1. परिशिष्ट संख्या 6 में मद 9 तथा 12