8. वास्तविक मुद्दा - Page 209

194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

संवैधानिक प्रगति के इतिहास में यही मिलता है कि जो समुदाय अपने को स्वतंत्र सामाजिक इकाई सिद्ध करने में सफल हो गया, उसका पृथक संवैधानिक अधिकारों का हक भी मान लिया गया। जो तत्व संवैधानिक सुरक्षा का दावा करते हैं, उन्हें प्रमाणित करना होगा कि वे शेष से भिन्न है। यदि वह सिद्ध कर देते हैं कि उनका अस्तित्व है, तो उन्हें संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए।

भारत में मुसलमानों, ईसाइयों, एंग्लो-इंडियनों, यूरोपियनों और सिखों के लिए संवैधानिक संरक्षण के विधान कैसे किए गए? यह सच है कि भारत का संविधान सिद्धांतों को आधार मानकर नहीं बनाया गया है। यह अनाप-शनाप तत्वों का पिटारा है, जो समय के साथ-साथ बढ़ता गया। इसका विकास सैद्धांतिक नहीं है। इसकी अवधारणा कामचलाऊ तो है ही, बेशक यह सिद्धांतों पर न भी टिका हो। संवैधानिक संरक्षण के लिए दलों के अधिकार को आनुषंगिक माना गया है। यदि यह बात मौलिक शर्त हो कि भारत में उनका अलग अस्तित्व है तो लोग उसे स्वतः मानने लगेंगे। इस दृष्टिकोण से इस प्रश्न पर विचार करने पर मैं सोचता हूं कि अस्पृश्यों का मामला इतने पर ही समाप्त नहीं कर दिया जाना चाहिए कि इस बारे में बहस की जरूरत नहीं। मुझे संवैधानिक संरक्षण की प्रस्तावना पर विचार करना होगा। उपसंहार खुद-ब-खुद सामने आ जाएगा, चाहे वह एक उदाहरणस्वरूप ही क्यों न हो।

मैंने अस्पृश्यों के लिए जो अनुमानित पृथक अस्तित्व का सृजन किया है, वह सभी प्रकार से युक्तिसंगत है। यह भी आवश्यक है कि अस्पृश्यों के पृथक अस्तित्व की समस्या पर अलग से और मौलिक ढंग से विचार किया जाए, क्योंकि कांग्रेस यह अच्छी तरह जानती है कि यदि एक बार वह मान लेती है कि अस्पृश्यों का पृथक अस्तित्व है, तो कांग्रेस अस्पृश्यों के संवैधानिक संरक्षण का अधिकार पाने से उन्हें नहीं रोक सकती। यदि कांग्रेस इस मांग का विरोध करती है तो केवल इसलिए कि वह समझती है कि लड़ाई का यह पहला मोर्चा है। यदि कांग्रेस इस प्रथम लड़ाई में पिछड़ गई, तो वह आगे की परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाएगी।

II

जो लोग भारत की परिस्थितियों से परिचित हैं, उन्हें यह जानकर आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस निर्विवाद को भी विवादास्पद बना देती है जैसे उनका यह कहना कि अस्पृश्य हिंदुओं से भिन्न हैं। परंतु चूंकि कांग्रेस यह कह रही है, इसलिए मुझे पूरी शक्ति से इस मामले को उठाना पड़ेगा।