8. वास्तविक मुद्दा - Page 216

वास्तविक मुद्दा

201

ऐसा अनुभव उन्हें पहले कभी नहीं हुआ था, इसीलिए उन्होंने इससे छुटकारा पाने का निश्चय किया। आरंभ में उन्होंने भी यही सोचा कि उनकी समस्या सामाजिक समस्या है और उसे हल करने के लिए उन्होंने लड़ाई भी लड़ी। यह बिल्कुल स्वाभाविक था। क्योंकि उन्होंने देखा कि उन्हें नींव बनाए रखने के लिए जो बाहरी झंडे गाढ़े गए थे, उनमें अस्पृश्यों और हिंदुओं के बीच रोटी-बेटी के व्यवहार पर घोर प्रतिबंध था। उन्होंने स्वभावतः यह निष्कर्ष निकाला कि उस परंपरागत कलंक को मिटाने के लिए यह आवश्यक था कि समानता के आधार पर हिंदुओं से सामाजिक व्यवहार स्थापित किया जाए, जिसका अर्थ था अंतर्जातीय भोज तथा अंतर्जातीय विवाह के विरुद्ध बनाए गए नियमों को समाप्त करना। दूसरे शब्दों में जब उन्हें अपनी दासता की स्थिति का पूरा ज्ञान हुआ तो उस कलंक को धोने के लिए अस्पृश्यों की अपनी योजना का पहला कार्यक्रम यह था कि समस्त हिंदुओं में सामाजिक समानता लाने के लिए जातपांत को समाप्त करने पर बल दिया जाए।

इसमें अस्पृश्यों को हिंदुओं के एक वर्ग में अपना मिला मिला। अस्पृश्यों की तरह अंग्रेजों के संपर्क में आने पर हिंदुओं ने भी यह अनुभव किया कि उनकी सामाजिक व्यवस्था बहुत दूषित है और वही अनगिनत सामाजिक बुराइयों की जननी है। इसीलिए उन्होंने भी सामाजिक सुधार के लिए आंदोलन किए। इसका आरंभ बंगाल में राजा राम मोहन राय से आरंभ हुआ और सारे देश मेंफैल गया और अंत में इंडियन सोशल रेफार्म कान्फ्रेंस का रूप ले लिया, जिसका मंत्र था राजनीतिक सुधार से पहले सामाजिक सुधार। अस्पृश्यों ने सोशल रेफार्म कान्फ्रेंस का अनुसरण किया और उसका समर्थन करने को उठ खड़े हुए। सभी को मालूम है कि सोशल रेफार्म कान्फ्रेंस का दम घोंट दिया गया। आज लोग इसे भूल गए हैं। इसे किसने समाप्त किया? क्या कांग्रेस ने? कांग्रेस का अपना नारा था फ्आद्योपांत राजनीतिय् और सोशल रेफार्म कान्फ्रेंस को इसका विरोधी समझा गया। कांग्रेस ने सोशल रेफार्म कान्फ्रेंस के उस मत को मान्यता नहीं दी जिसके अनुसार राजनीतिक सुधार के लिए सामाजिक सुधार आवश्यक और शीघ्रता से उठाया जाने वाला कदम था। कांग्रेस ने इसे अपना प्रतिद्वंद्वी माना। उसने यह मानने से इंकार किया कि कांग्रेस मंच और व्यक्तिगत रूप से कांग्रेसी नेताओं ने सोशल रेफार्म कान्फ्रेंस के माध्यम से अपनी मुक्ति की सभी आशाएं धूल-धूसरित होती हुई देखी, तब उन्होंने अपने आपको सुरक्षित करने के लिए राजनीतिक साधनों की तलाश करने पर जोर दिया। कांग्रेसियों का यह कहना कि सामाजिक समस्या कोई समस्या नहीं है, कोरा पाखंड है।

यह कहना गलत है कि अस्पृश्यों की समस्या केवल सामाजिक समस्या है। क्योंकि यह दहेज प्रथा, विधवा विवाह आदि जैसे उदाहरण, जिन्हें सामाजिक समस्याएं