1. अनोखी घटना - Page 22

अनोखी घटना

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ठुकराई जानी चाहिए। एटन तथा हैरों उच्च वर्गों के स्कूल हैं तथा फ्रबगीय्,

विंचेस्टरय् के स्कूल भी उन्हीं कुलीन लोगों के लिए हैं जो थोड़े कम

ठाठ-बाट वाले हैं। इसके बाद वे स्कूल हैं जिनमें मध्यम वर्ग के बच्चे पढ़ने

आते हैं। तत्पश्चात् बोर्ड स्कूल हैं जिनमें शिल्पकारों तथा साधारण श्रमिक

वर्ग के बच्चों को शिक्षा दी जाती है और इन सबसे निम्न स्तर या लावारिसों,

अनाथों और छितरे हुए लोगों के बच्चों के स्कूल हैं जिनके नाम से ही उन

स्कूलों के विद्यार्थियों के स्तर का संकेत मिल जाता है। धर्मार्थ या खैराती

शिक्षा संस्थान भी हैं। उन दरिद्र स्कूल के बच्चों को एटन एवं हैरो स्कूलों

में प्रवेश देने की दलील देने वाले व्यक्तियों के साथ तर्क नहीं किया जाता

उसकी खिल्ली उड़ाई जाती है। यहां पर जब बंधुत्व भाव के नाम पर वैसा

ही प्रस्ताव लाया जाता है तो लोग उसका अनौचित्य स्पष्ट रूप में कहने में

लज्जा का अनुभव करते हैं और वे यह नहीं महसूस करते कि दलित वर्गों

पर जो अमानुषिक अत्याचार किए गए हैं उनके विरुद्ध वैसा प्रस्ताव केवल

हिंसात्मक प्रतिक्रिया सिद्ध करेगा और सही भावनाएं उभर कर सामने आएंगी।

प्रायः कहा जाता है कि सरकारी स्कूल सामाजिक असमानताओं या भेदभाव

की ओर ध्यान नहीं देते, वे वहां ऐसा प्रदर्शन करते हैं मानों वे अनिवार्यतः

विदेशी भावनाओं से प्रेरित हैं। वे अपने-अपने लोगों के बच्चों के साथ वैसा

व्यवहार नहीं करते यद्यपि वे भारतीय बच्चों के प्रति उदासीन रहते हैं और

वे गंदे और साफ बच्चों को एक समूह में एकत्र कर देते हैं। जब सुसंस्कृत

बच्चों को स्कूल में भरती कराया जाता है तब यहां युवकों की भाषा के भाव

को सरलता से जाना जा सकता है और यह भारतीयों के हित में है कि वे

अपने बच्चों को उन स्कूलों में भेजें जहां वे अशिष्ट प्रवृत्तियों से बच सकें

जैसा कि इंग्लैंड में अंग्रेज अपने बच्चों के मामले में करते हैं।य्

ऐसे प्रस्ताव को पारित करने पर इसे अनूठी घटना इसलिए बताना न्यायोचित है क्योंकि इसका भी कारण एक यह है कि यह प्रस्ताव कांग्रेस की घोषित नीति के सर्वथा प्रतिकूल था। इन दिनों जबकि कांग्रेस के फ्रचनात्मक कार्यक्रमय् का गली-गली में हर समय प्रचार हो रहा था तथा असहयोग आंदोलन एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन से उसे कुछ फुर्सत मिली थी, वर्तमान समय के कांग्रेस जनों तथा उनके मित्रों को यह प्रस्ताव चकित कर सकता था। कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशनों की अध्यक्षता करने वाले अध्यक्षों के भाषणों के निम्नलिखित उद्धरणों से यह स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस की नीति यह रही है कि वास्तव में समाज सुधार के प्रश्नों का कांग्रेस की नीति, उद्देश्य एवं लक्ष्य के साथ कोई सम्बन्ध नहीं है।