1. अनोखी घटना - Page 23

8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दूसरा अधिवेशन वर्ष 1886 में कलकत्ता में हुआ था जिसकी अध्यक्षता श्री दादाभाई नौरोजी ने की थी। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने समाज सुधार के विषय में कांगेस के रवैए का उल्लेख करते हुए कहा थाः

फ्इस बात पर बल दिया गया है कि कांग्रेस को सामाजिक सुधार के प्रश्न

को दृढ़ता के साथ उठाना चाहिए (समर्थन में हर्ष-ध्वनि) और इसमें हमारी

असफलता की भर्त्सना की गई है। निःसंदेह सामाजिक सुधार की आवश्यकता

के प्रति राष्ट्रीय कांग्रेस का कोई सदस्य उतना जागरूक नहीं है जितना मैं हूं।

परंतु महानुभावों, प्रत्येक काम के लिए उचित समय, उचित परिस्थितियां, दलों

और उचित स्थान की आवश्यकता होती है (हर्ष-ध्वनि)। हम राजनैतिक दल

के रूप में अपने राजनैतिक उद्देश्यों को अपने शासकों के समक्ष प्रस्तुत करने

हेतु एकत्र हुए हैं सामाजिक सुधारों पर विवाद करने के लिए नहीं, और यदि

आप हमें इसकी उपेक्षा का दोष देते हैं तो आपको हाउस ऑफ कॉमन्स को

भी समान रूप से दोष देना चाहिए कि उसने भी गणित और वास्तविकता की

गूढ़ समस्याओं जैसे विषयों पर चर्चा नहीं की। लेकिन इसके अतिरिक्त वहां

पर भी प्रत्येक प्रांत में सभी जातियों के हिंदू हैं और प्रत्येक प्रांत में उनकी

सामाजिक व्यवस्थाओं और रीति-रिवाजों में बहुत अंतर हैं। मुसलमान, और

प्रत्येक संप्रदाय के ईसाई, पारसी, सिख और ब्राह्मण इत्यादि विभिन्न नामों से

जाने जाते हैं और सभी भारत के ही समेकित अंग हैं (हर्ष-ध्वनि)। अतः

विभिन्न जातियों वाला यह समूह प्रत्येक वर्ग में वांछनीय सामाजिक सुधारों

पर कैसे चर्चा कर सकता है? अतः केवल उसी वर्ग के लोग ही अपने वर्ग

में वांछित सुधारों के बारे में उचित कार्यवाही करें जिनकी उन्हें अपेक्षा है।

राष्ट्रीय कांग्रेस को केवल राष्ट्र के सामान्य हितों तक ही अपने को सीमित

रखना चाहिए और अन्य वर्गों के सामाजिक सुधारों के सामंजस्य तथा अन्य

मामले उन्हीं वर्गों पर छोड़ देने चाहिएं।य्

वर्ष 1887 के आयोजित तीसरे अधिवेशन में जो माननीय श्री बदरूद्दीन तैयब जी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ था श्री तैयब जी ने समाज-सुधार पर पुनः चर्चा करते हुए अपने भाषण में कहा था µ

फ्........हमारी इन कार्यवाहियों पर आपत्ति करते हुए यह कहा गया है कि

कांग्रेस सामाजिक सुधार जैसे प्रश्न पर विचार नहीं करती..........। मैं स्पष्ट कर