विदेशियों से आग्रह
211
उस चुनाव से क्या परिणाम सामने आए वह इस पुस्तक के छठे अध्याय में दर्शाया जा चुका है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि विदेशियों के समक्ष जब तथ्य पेश होते हैं, तो कांग्रेस द्वारा सबका प्रतिनिधित्व करने का प्रचार यहां तक कि अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व करने का प्रचार झूठा साबित होता है और स्पष्ट हो जाता है कि कांग्रेस के अतिरिक्त दूसरी पार्टियां मुख्यतया अस्पृश्य भारत की राजनीतिक समस्या पर कुछ भिन्न मत रखती हैं।
दूसरा कारण विदेशियों का कांग्रेस को समर्थन देने का यह है कि उनका विश्वास है कि कांग्रेस देश की आजादी की लड़ाई लड़ रही है। वे देखते हैं कि कांग्रेस सविनय अवज्ञा आंदोलन करके, विदेशी सरकार द्वारा बनाए कानून का उल्लंघन करके, करों का भुगतान रुकवा कर, अदालतों में गिरफतारी देकर, सरकार से असहयोग करने का प्रचार करके, कार्यालयों का बहिष्कार करके तथा देश की आजादी के लिए आत्म-बलिदान एवं त्याग का प्रचार करके ब्रिटिश सरकार से लड़ने में जुटी है। विदेशियों की निगाह में कांग्रेस के अतिरिक्त अन्य पार्टियां नगण्य हैं। इन सबसे विदेशी यह नतीजा निकालते हैं कि जब कांग्रेस स्वतंत्रता प्रेमी के रूप में देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ रही है तो फिर स्वतंत्रता संग्राम में दूसरी पार्टियों ने कांग्रेस का साथ क्यों नहीं दिया? यहां मैं इस प्रश्न के दूसरे पहलू पर स्थिति स्पष्ट करना चाहूंगा कि कांग्रेस किस आजादी के लिए लड़ रही है। मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि आजादी की लड़ाई में दूसरी पार्टियों ने कांग्रेस का साथ क्यों नहीं दिया? यहां मैं इस प्रश्न के दूसरे पहलू पर स्थिति स्पष्ट करना चाहूंगा कि कांग्रेस किसकी आजादी के लिए लड़ाई लड़ रही है?
II
कांग्रेस के स्वाधीनता संग्राम का पक्ष लेते हुए विदेशी इस बात में भेद नहीं करते कि देश की आजादी की लड़ाई किसके लिए लड़ी जा रही है - देश की आजादी के लिए या देश के सभी निवासियों की आजादी के लिए। यह भेद न समझने के कारण विदेशी गुमराह हो गए हैं। क्योंकि समाज, राष्ट्र और देश अमूर्त हैं। यह बताने की आवश्यकता नहीं कि राष्ट्र यद्यपि एक शब्द है परन्तु वह कई वर्गों को समेटता है। दर्शन शास्त्र के अनुसार फ्राष्ट्रय् यद्यपि एक शब्द है, पर अर्थ बहुवर्गीय है। दर्शन शास्त्र के अनुसार फ्राष्ट्रय् को एक इकाई कहा जा सकता है, परंतु समाज शास्त्र के अनुसार यह कई वर्गों वाला समूह होता है और आजादी यदि वास्तविक रूप में आती है तो वह राष्ट्र में समाहित सभी वर्गों के लिए होनी चाहिए मुख्यतया उन लोगों के लिए जो दासता का जीवन बिता रहे हैं। इसके फलस्वरूप केवल इस तथ्य से संतुष्ट