9. विदेशियों से आग्रह - Page 235

220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

स्वतंत्र टिकटों पर हिंदुओं के खड़े होने से रोकने के लिए कांग्रेस ने कैसे-कैसे ओछे हथकंडे अपनाए। जो हथकंडे अपनाए गए थे, उनका लक्ष्य था कि विधानसभाओं को अपमान करने का निशाना बनाना। तदनुसार कांग्रेस ने विभिन्न प्रांतों में इस बात का प्रचार करना आरंभ कर दिया कि विधानसभाओं में कौन लोग जाएंगे। वे केवल नाई, मोची, कुम्हार और झाडू लगाने वाले भंगी होंगे। जुलूस में नारे का प्रश्नवाचक भाग एक आदमी बोलता था कि विधानसभाओं में कौन जाएंगे। भीड़ की ओर से उत्तर दिया जाता था, नाई, मोची, कुम्हार और जमादार। जब कांग्रेसियों ने देखा कि चुनावों में खड़े होने से इस प्रकार डरा कर रोकने का उपाय कारगर नहीं सिद्ध हो रहा है, तो उन्होंने इससे अधिक कठोर कदम उठाए। कांग्रेसियों ने यह वातावरण बनाया कि कोई भी इज्जतदार उम्मीदवार चुनाव में खड़े होने से कतराएगा यदि उन्हें निश्चय हो जाए कि विधानसभाओं में उन्हें नाइयों, कुम्हारों और भंगियों के साथ बैठना पड़ेगा। इसी विश्वास पर कांग्रेसियों ने वैसे ही शूद्र समुदायों से संबंधित उम्मीदवारों को चुनाव में कांग्रेस टिकट देकर खड़ा किया और उन्हें निर्वाचित कराया। कांग्रेस की ऐसी निर्लज्ज करतूतों के कुछ उदाहरण दिए जा सकते हैं। वर्ष 1920 के चुनाव में मध्य प्रांत विधानमंडल के लिए एक मोची (फगुआ रोहितास) को चुना गया। वर्ष 1930 के चुनाव में कांग्रेसियों ने मध्य प्रांत विधानमंडल के लिए दो मोचियों गुरु गोसाई आगमदास और बलराज जैसवार तथा एक ग्वाले चुन्नू को चुना और एक नाई अर्जुन लाल को और पंजाब में एक भंगी बंसीलाल चौधरी को चुना। यह कहा जा सकता है कि यह पुराना इतिहास है। वर्ष 1934 में कांग्रेस ने केंद्रीय विधानमंडल के लिए एक कुम्हार भगत चंदी मल गोला को चुना। मैं वर्ष 1943 में बम्बई की एक बस्ती अंधेरी के लिए नगरपालिका चुनाव का संदर्भ दे रहा हूं। कांग्रेस ने अपमान के तौर पर नगरपालिका के लिए एक नाई को चुना।

क्या घोर अंधेर हुआ? आयरलैंड में सिन्नाफेन ने ब्रिटिश पार्लियामेंट का बहिष्कार किया। परंतु क्या उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए अपने ही देश के लोगों का ऐसा वीभत्स रूप अपनाया? 1930 में विधानसभा के बहिष्कार करने का आंदोलन बड़ा दिलचस्प था। 1930 में प्रांतीय विधानमंडलों के लिए हुए चुनावों में जो घटनाएं घटीं वे 1930 में गांधी जी के नमक सत्याग्रह के दौरान घटीं। मैं आशा करता हूं कि कांग्रेसी इतिहासकार डॉ. पट्टठ्ठभिसीतारमैया यह बताएंगे कि कैसे उन्होंने वायसराय लॉर्ड इर्विन को नोटिस देने का निश्चय किया, जिसमें उन्होंने अपनी मांगों की एक सूची एक निश्चित समय तक मान लेने के लिए वायसराय को पेश की थी और वायसराय द्वारा मांगों के न मानने पर श्री गांधी ने किस प्रकार सविनय अवज्ञा आंदोलन खड़ा करने का निश्चिय किया। कैसे श्री गांधी ने नोटिस ले जाने के लिए एक अंग्रेज को चुना?