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विदेशियों से आग्रह

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इस विषय की महत्ता को देखते हुए, मैंने उन मुद्दों पर आवश्यक सूचना एकत्र करना आवश्यक समझा, जो 1937 के चुनावों में कांग्रेस टिकट पर प्रांतीय विधान-मंडलों के लिए चुने गए सदस्यों से संबंधित है। मुझे प्रत्येक सदस्य के संबंध में सही सूचना प्राप्त करने में सफलता नहीं मिली। बहुतों को मैंने बिना वर्गीकृत किए ही छोड़ दिया है। परंतु मैंने जो सूचना एकत्र की है, वह कांग्रेस की विजय पर प्रकाश डालती है और स्पष्ट करती है कि भारतीय अपनी स्व्तंत्रता और कल्याण के संदर्भ में कांग्रेस की इस विजय का क्या अर्थ लगाते हैं? तालिका 18 में ब्राह्मणों और गेर-ब्राह्मणों तथा उन अनुसूचित जातियों का अनुपात क्या है जो कांग्रेस टिकट पर प्रांतीय विधानसभाओं के लिए चुने गए थे। हिन्दू जनसंख्या की तुलना में ब्राह्मणों का अनुपात कितना कम है जो यह नहीं जानते वे यह भी नहीं समझ सकेंगे कि कांग्रेस के चुनाव में ब्राह्मणों को कितना प्रतिनिधित्व मिला है। लेकिन जो यह जानते हैं वे समझेंगे कि ब्राह्मणों ने अपनी आबादी के अनुपात से कहीं अधिक प्रतिनिधित्व प्राप्त किया है।

कांग्रेस ने किस हद तक धनवान लोगों को जैसे वैश्यों, व्यापारियों और जमींदारों को टिकट दिए हैं? तालिका से स्पष्ट है कि वैश्य, व्यापारी वर्ग और भूस्वामी वर्ग को कांग्रेस टिकट पर चुना गया है। (तालिका 19 देखें)

वैश्य, व्यापारी और जमींदार बड़ी संख्या में कांग्रेस टिकट पर चुनाव में खड़े हुए थे। क्या इसमें भी कोई संदेह है कि कांग्रेस ने शासक वर्ग के विरुद्ध लड़ाई छेड़ने के बजाए राजसत्ता दिलाने के लिए वास्तव में शासक वर्ग की मदद की? चुनाव में कांग्रेस विजय का एक पहलू और है जिसकी पोल खोलना आवश्यक है। वह पहलू कांग्रेसी मंत्रिमंडलों के गठन से संबंधित है। ख्1,

तालिका 20 व 21 से स्पष्ट है कि प्रांतीय विधानसभाओं में जहां कांग्रेस को बहुमत मिला उनमें ब्राह्मण मंत्रियों की क्या स्थिति थी।

सभी हिंदू प्रांतों में ब्राह्मण मुख्य मंत्री थे। सभी हिंदू प्रांतों में गैर हिंदू मंत्रियों को छोड़कर सभी ब्राह्मण मुख्यमंत्री थे। सभी हिंदू प्रांतों में यदि गैर हिंदू मंत्री नहीं थे, तो वहां ब्राह्मण मंत्रियों से ही मंत्रिमंडल गठित किए गए थे। ऐसा खासतौर से संयुक्त प्रांत में किया गया था, जहां के पंडित जवाहरलाल नेहरू हैं।

क्या इस कथन में कोई संदेह बचा है कि इस देश में ब्राह्मण ही शासक वर्ग हैं? क्या इसमें भी संदेह है कि कांग्रेस, जो स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रही है वह केवल शासक वर्ग के लिए लड़ रही है? क्या इसमें कोई संदेह है कि कांग्रेस ही शासक वर्ग है और शासक वर्ग ही कांग्रेस है? क्या इसमें कोई संदेह है कि 1937 में जब

  1. इंडियन इन्फारमेशन, 15 जुलाई, 1939