9. विदेशियों से आग्रह - Page 249

234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

शासक वर्ग के कुछ सदस्य ख्2, इस हद तक पहुंच गए हैं कि उन्होंने शोषित वर्ग की मांग को बकवास और हास्यास्पद बताते हुए प्रचार करने के लिए कटाक्षपूर्ण व्यंग्यात्मक

मान नहीं है। हम 2375 की संख्या संविधान की मूलभूत संख्या निर्धारित करते हैं। भविष्य में, प्रत्येक सम्प्रदाय के दावे उनकी कुल संख्या के आधार पर किए जाएंगे तथा सभी नियुक्तियां, विभिन्न संस्थाओं की सदस्यता, और वास्तव में देश में जहां तक संभव होगा, सब कुछ अनुसूची में दिए गए अनुपात के अनुसार होगा। वाइसराय की कार्यकारी परिषद में 475 सदस्य होंगे जो यथासम्भव प्रत्येक सम्प्रदाय की एक-पांचवी संख्या के अनुसार होंगे और ये सदस्य एक वर्ष तक अपने पद पर रहेंगे ताकि पांच वर्षों में प्रत्येक सम्प्रदाय को अपनी सदस्यता का सही भाग मिल जाए। प्रत्येक उच्च न्यायालय में 125 न्यायाधीश होंगे और प्रत्येक न्यायाधीश एक वर्ष तक पदभार संभालेगा, यद्यपि इस व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक वर्ग अपनी वास्तविक भागीदारी 19 वर्ष हो जाने के बाद ही प्राप्त कर सकेगा। अन्य प्रकार की नियुक्तियों की संख्या, सभी दावों के सही समायोजन के प्रयोजन से, उसी आधार पर की जाएगी।

इन आंकड़ों वाली सभी संस्थाओं के समुचित कार्यकरण के लिए, जितनी भी विद्यमान सरकारी इमारतों को गिराना आवश्यक हो, गिरा दिया जाए और आवश्यकता के अनुरूप उन्हें उचित आकार में पुनः निर्मित किया जाए।

2. भारत सरकार की अधिसूचना, 1932 ः भारत सरकार अधिनियम, 1931, के उपबंधों के अनुसार, महामहिम सम्राट ने गवर्नर-जनरल की कार्यकारी परिषद में निम्नलिखित 475 भद्र पुरुषों को सदस्यों के रूप में नियुक्त किया है -

  1. मातादीन रामदीन (जाति नाई), चिकित्सा विभाग के शल्य-कक्ष के प्रभारी

  2. अल्लाबक्श पीरबक्श (मुसलमान ऊँट चालक), सेना विभाग के ऊँट परिवहन विभाग के

प्रभारी

  1. रामास्वामी (जाति आन्ध्र मेहतर), सार्वजनिक निर्माण विभाग की सड़क सफाई शाखा

के प्रभारी

  1. जगन्नाथ भट्टठ्ठाचार्य (कुलीन ब्राह्मण, पुरोहित), पंजीकरण विभाग के घरेलू अनुभाग के

प्रभारी

4. सभी स्थानीय सरकारों को पत्र, 1934ः विधान सभा द्वारा पास किए गए एक संकल्प, जिससे भारत सरकार पूरी तरह सहमत है, के अनुसरण में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि भविष्य में सरकार में होने वाली प्रत्येक नियुक्ति, आवेदक की योग्यता की अपेक्षा के बिना प्रत्येक सम्प्रदाय को बारी-बारी से दी जानी चाहिए।

5. बम्बई सरकार गजट में अधिसूचना, 1934ः बम्बई सरकार दिसम्बर में निम्नलिखित नियुक्तियां करेगी। विभिन्न नियुक्तियों के लिए आवेदक उन जातियों के होने चाहिएं जो शासकीय आदेश संख्या.. ......दिनांक 30 नवम्बर, 1934 में प्रत्येक के सामने दिखाई गई है।

  1. मुख्य सिंचाई इंजीनियर (सिंध)ः उत्तर कनारा की कुनबी

  2. ऐलफिन्सटन कॉलेज, बम्बई में संस्कृत प्राध्यापकः सिंध का बलूची पठान

  3. महामहिम के अंगरक्षक का कमांडेंटः उत्तर गुजरात का मारवाड़ी

  4. सरकार का परामर्शी वास्तुकारः दक्खिन का वंडारी (घुमंतु कंजर)

  5. इस्लामी संस्कृति का निदेशकः कड़ादा ब्राह्मण

  6. शरीर शास्त्र का प्राध्यापकः (ग्राट मेडीकल कॉलेज)ः मुसलमान कसाई

  7. यर्वदा जेल अधीक्षकः घंटी चोर

  8. शराबबंदी के दो आयोजकः धराला (कैरा जिले का भील) (पंच महल) 6. उच्च न्यायालय के एक मामले की रिपोर्ट, 1935ः क.ख. (जाति तेली) पर अपने पिता की, जब वह सो रहे थे, निर्मम हत्या करने का आरोप था। न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जूरी ने आरोपी को दोषी पाया है। सज़ा निर्धारित करने से पूर्व, न्यायाधीश ने आरोपी के वकील से पूछा कि उसे कुछ कहना तो नहीं है। वकील, श्री बोमनजी, ने कहा कि वह फैसले से तो सहमत है,