1. अनोखी घटना - Page 25

10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

को भी हमारे लड़कों के समान शिक्षा मिले और वे विश्वविद्यालयों में पढ़ने जाएं तथा ज्ञान के व्यवसायों को अपनाएं। दूसरे लोग जो कहीं अधिक कायर किस्म के हैं वे इसी बात से संतुष्ट हो जाएंगे कि उनके बच्चों का बाल-विवाह नहीं होगा और उनकी बचपन में विधवा हुई लड़कियों को वैधव्य का जीवन नहीं बिताना पड़ेगा। अन्य इससे अधिक डरपोक लोग हैं जो सामाजिक समस्याओं को अपने आप स्वयं हल हो जाने देंगे।

मुझे विश्वास है कि कांग्रेस बनी है और है तथा यह पूर्णतया राजनीतिक संस्था रहेगी और केवल राजनीतिक कार्य करेगी। मुझे डर है कि वे, चाहे अपने देश के हों अथवा अन्य देश के हों, हमें सामाजिक विषय के संबंध में काम न करने का दोष देंगे। इससे उन निंदक बातों को बढ़ावा मिलेगा जिनसे हमें अपने कान बंद करने पड़ेंगे जैसा कि फ्एज ऑफ कंसेंट बिलय् के विषय में किए थे। और हम बदनामी के कगार पर खड़े हो जाएंगे। इससे हमारा कोई हित नहीं सधेगा। हमें ऐसे आलोचक भी देखने पड़ेंगे जो केवल यह कहते हैं कि कांग्रेस केवल सामाजिक समस्याओं पर ही चर्चा कर सकती है।

मुझे उन पर गुस्सा नहीं करना है जो यह कहते हैं कि जब तक हम अपनी सामाजिक व्यवस्था नहीं सुधारते तब तक हम राजनीतिक सुधार करने योग्य नहीं होंगे। मुझे इन दोनों में कोई संबंध नहीं दीखता है। राजनीतिक सुधार, जिसके लिए हम हर वर्ष कहते हैं, को ही लीजिए कि एक ही अधिकारी से न्यायपालिका और कार्यपालिका के कार्य न कराए जाएं। इन दोनों के बीच क्या संबंध हो सकता है जो पूर्णतया राजनैतिक तथा सामाजिक सुधार हो सकता है? इसी प्रकार स्थाई बंदोबस्त (पर्मानेंट सेटलमेंट) को ही लीजिए जिसमें वनों से संबंधित नियमों में हम सुधार लाने के पक्ष में तर्क देते हैं। मैं फिर पूछता हूं कि इसमें समाज सुधार का प्रश्न कहां उठता है? क्या हम ऐसा करने के लिए इस कारण योग्य नहीं हैं कि हमारी विधवाएं अविवाहित रह जाती हैं और हमारी लड़कियों का बाल-विवाह होता है जबकि अन्य देशों में ऐसा नहीं है। क्या ऐसा इसलिए है कि हमारी पत्नियां एवं लड़कियां हमारे साथ खुलकर हमारे दोस्तों से मिलने नहीं जातीं? क्या यह इसलिए है कि हम अपनी लड़कियों को ऑक्सफोर्ड एवं कैंब्रिज नहीं भेज सकते। (हर्षध्वनि)य्