238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पर शासन चाहता है, जो नाजीवाद के उस सिद्धांत की मनमानी के सिवाए कुछ नहीं, जिसके अंतर्गत अपने को श्रेष्ठ बताने वाला ही सर्वशक्तिमान होना चाहिए।
VIII
जो विदेशी भारतीय राजनीति को समझना चाहते हैं और इससे उत्पन्न समस्याओं का निराकरण करने में सहयोग देना चाहते हैं, उन्हें मालूम होना चाहिए कि भारतीय राजनीति किन सिद्धांतों पर आधारित है। यदि विदेशी उन्हें भली-भांति समझने में असफल रहते हैं, तो वे ऐसे दल के हाथों की कठपुतली बनकर रह जाएंगे जो उन्हें भ्रम में कैद करके रखना चाहते हैं। भारतीय राजनीति की ये मूलभूत बातें हैंः (1) शासित वर्ग के प्रति शासक वर्ग की मनोवृत्ति, (2) शासक वर्ग के साथ कांग्रेस का संबंध, (3) शासित वर्गों के लिए संवैधानिक संरक्षणों की राजनीतिक मांगों का मूल आधार।
उपरोक्त (1) के विषय में पहले ही ऊपर बहुत कुछ कहा जा चुका है, जिस पर विचार कर विदेशी अपनी धारणा बना सकते हैं। मैंने जो पक्ष प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया है और उसकी पुष्टि में जिन तथ्यों और तर्कों को प्रस्तुत किया है, वह स्पष्ट है। इससे प्रकट होता है कि सार्वभौमिक स्वतंत्र भारत इस स्थिति से भिन्न स्थिति का देश होगा, जिसमें शासक वर्ग की सेवा करने वाला कोई शासित वर्ग न हो। उचित संरक्षण प्रदान करने से शासक वर्ग द्वारा सरकार का आधिपत्य जमाने की उनकी शक्ति सीमित हो जाएगी और उसकी सत्ता हथियाने के हथियार की धार भोंटी हो जाएगी। यही वह बात है जिसके लिए अस्पृश्य बल देकर कर रहे हैं और कांग्रेस उसका विरोध कर रही है। कांग्रेस और अस्पृश्यों के मध्य जो विवादग्रस्त प्रश्न है, वह संवैधानिक संरक्षण् ों की व्यवस्था पर ही केंद्रित है। प्रश्न उठता है कि क्या भारतीय संविधान में अस्पृश्यों के लिए संरक्षण होगा? विदेशी न तो इस समस्या को समझते हैं और न यही समझते हैं कि कांग्रेस के कथित प्रतिनिधिक स्वरूप का इस समस्या से कोई संबंध नहीं है। हो सकता है कि कांग्रेस प्रतिनिधि संस्था हो, लेकिन अस्पृश्यों की इस समस्या से उसे कोई सरोकार नहीं। उस समस्या का हल केवल आवश्यकताओं पर आधारित हो सकता है और इस विषय में यह प्रश्न हो सकता है कि क्या अस्पृश्य, जो संरक्षण मांग रहे हैं, वह उनके लिए जरूरी है? विदेशी जो इस आधार पर अस्पृश्यों के विरुद्ध कांग्रेस का समर्थन करते हैं कि कांग्रेस सबका प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है, सही नहीं है। विदेशियों की वह अपेक्षा न्यायसंगत है कि अस्पृश्यों के संरक्षण की मांग को न्यायोचित प्रमाणित किया जाए। विदेशियों का यह कहना युक्तिसंगत है कि यह कह देना भर काफी नहीं है कि भारत में शासक वर्ग है। अस्पृश्यायों को यह भी साबित करना है कि भारत का शासक वर्ग कितना अधर्मी एवं कितना मक्कार है और वह वयस्क मताधिकार की