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विदेशियों से आग्रह

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शक्ति के आगे नहीं झुकेगा। यह ऐसी स्थिति है जिसका सामना अस्पृश्यों को करना है, क्योंकि निस्संदेह भारत में शासक वर्ग की स्थिति अन्य देशों की अपेक्षा भिन्न है। अन्य देशों में शासक वर्ग तथा शासित वर्गों के मध्य अधिक सहनीय और स्वाभाविक दूरी होती है, जो दोनोंवर्गों को आपस में मिलने से रोकने की दीवार नहीं होती। उनकी दूरी केवल एक विराम होता है। भारत में उच्च वर्ग एक तिलस्मी किले में सुरक्षित है, जहां शोषित घुस ही नहीं सकता। दोनों वर्गों की संवेदनाएं भी प्रतिकूल हैं। अन्य देशों में शासक वर्ग और शासितों के बीच सत्ता हस्तांतरण की भरपाई होती रहती है, जिससे वे शासक वर्ग की तरह उच्च पदों पर पहुंच जाते हैं। भारत में ऐसी व्यवस्था बन गई है, जिससे शासक बदल जाते हैं, तो दूसरे वर्ग की भरपाई हो जाती है। भारत का शासक वर्ग जन्मगत है। दूसरा वंचित वर्ग सदा वंचित ही रहता है। ऐसा विभेद महत्वपूर्ण विभेद है। जहां पर शासक वर्ग घोंघों की तरह खोज में सुरक्षित बैठे रहते हैं और जो वंश परंपरागत चलते रहते हैं। यहां जन आचरण सामाजिक-दर्शन और सामाजिक मनोवृत्ति अंगद का पांव ही बनी रहती है और जिसमें स्वामी तथा सेवक का संबंध अटूट माना जाता है। सुविधा संपन्न और सुविधाहीन का भेद व जाति कठोर है। रंग में यह काली कमली है। अन्य देशों में ऐसी लक्ष्मण रेखा नहीं है। दोनों के आवरणों में एक बारीक डोर है। मानसिक समरसता है, इसलिए वहां शासक और शासित के रिश्तों में लोच होती है। इस अंतर के पीछे जो सत्य छिपा है, उसे समझ लेने के बाद विदेशियों को यह आभास होगा कि जहां अन्य देशों में तो व्यस्क मताधिकार द्वारा शासक वर्ग पर संतोषजनक नियंत्रण किया जा सकता है, भारत में शासित पक्ष जैसे अछूत संविधान में इसलिए अतिरिक्त संरक्षण प्रदान की मांग करते हैं कि उनकी मांग भारत में कांग्रेस द्वारा लड़ी आजादी की लड़ाई से अधिक जायज है और जो कांग्रेस आजादी मांगती है वह शासितों को सुरक्षा देने के विरुद्ध है। कांग्रेस निर्बाध रूप से सत्ता शासक वर्ग के हाथों में सौंपना चाहती है।

दूसरे पक्ष पर भी कुछ तथ्य जुटाए गए हैं। इन तथ्यों को ध्यान में रखने पर विदेशियों को स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस और शासक वर्ग का कितना घनिष्ठ संबंध है। उन तथ्यों से स्पष्ट हो जाएगा कि भारत में शासक वर्ग कांग्रेस की टोली में क्यों घुस गया है और सभी लोगों से कांग्रेस का समर्थन करने के लिए क्यों कहता है? संक्षेप में, शासक वर्ग को भली-भांति मालूम है कि सुविधाहीन लोगों का आंदोलन वर्ग सिद्धांतों, वर्गीय हितों और जातीय संघर्ष पर आधारित है। यह एक दिन सुविधासंपन्न वर्ग की कब्र खोद देगा। वे जानते हैं कि सवेक वर्गों की मांग को पटरी से उतारने के लिए राष्ट्रीयता और एकजुटता का मोह दिखाकर उन्हें बुद्धू बना दिया जाए। वे यह भी समझते हैं कि कांग्रेस