240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ही ऐसा मंच है, जिसमें शासक वर्ग का हित सुरक्षित है, क्योंकि यदि कोई दल ऐसा है, जिसके मंच से अमीर, गरीब, ब्राह्मण, जमींदार और असामी, महाजन और कर्जदार के बीच के मुद्दों पर कुठाराघात करके संघर्ष की ओर से ध्यान बंटाया जा सकता है, तो वह एकमात्र कांग्रेस है। कांग्रेस ही मंच है, जहां से देशभक्ति और राष्ट्रीयता एकता का झंडा फहरा कर उनका हितसाधन कर सकती है।
यदि ये दोनों दृष्टिकोण ठीक से समझ में आ जाएं तो विदेशियों को तीसरा दृष्टिकोण भी समझ में आ जाएगा जो सुविधाहीन दलित वर्गों के राजनीतिक संरक्षण पर आधारित है।
सुविधाहीन शासित वर्गों द्वारा आरक्षण की मांग करना वास्तव में शासक वर्ग की शक्ति को नियंत्रित करना है। यूरोपीय देशों में भी समाज के कुछ वर्गों की शक्ति पर नियंत्रण रखने की मांग की जाती है। वहां उत्पादक, वितरक, सूदखोरों और भूस्वामियों पर नियंत्रण है। भारत के सिवा किसी अन्य देश में एक समान जाति के हितों के संरक्षण के लिए कुछ वर्गों की शक्ति पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता पड़ी है। आरक्षण देश में शासक वर्गों के हाथों में राजनीतिक शक्ति संग्रह रोकने और देश की सामाजिक संस्थाओं में परस्पर संवैधानिक संबंध कायम करने के लिए अतिरिक्त कुछ नहीं कर सकता। इतने तथ्यों और तर्कों के आधार पर स्पष्टीकरण देने के पश्चात्, मैं नहीं समझता कि विदेशियों को वास्तविक स्थिति समझने और विश्वास करने में कठिनाई होगी कि कांग्रेस के प्रचार का दूसरा पहलू भी है। यदि उपरोक्त तथ्यों और आंकड़ों के बावजूद कोई विदेशी वस्तुस्थिति नहीं समझता और उन लोगों की बात पर शांति तथा धैर्य से विचार नहीं करता, तो यह उसके चरित्र और समझ का दोष है।
IX
भारतीय राजनीति के संबंध में विदेशियों के दृष्टिकोण का एक दुखद पहलू भी है। इसका जिक्र न करना असंभव है। जो विदेशी भारतीय राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं, उन्हें तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है। पहली श्रेणी वह है, जो उन सामाजिक विभाजकों के नियमों से अवगत है, जिसके कारण भारतीय राजनीति टुकड़ों-टुकड़ों में बंटी है जैसे कि बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक के बीच विभाजन तथा हिंदुओं और अस्पृश्यों के बीच पृथकता है। उनका मुख्य उद्देश्य है कि इस पृथकता के प्रश्न को समुचित संवैधानिक संरक्षणों द्वारा हल करने की जरूरत नहीं, बल्कि इन विभाजक तत्वों के रास्तों का देश की संवैधानिक प्रगति को रोकने के लिए प्रयोग किया जाए। दूसरी श्रेणी उन विदेशियों की है, जो इन विभाजकों पर ध्यान ही नहीं देते, वे अल्पसंख्यकों और अस्पृश्यों पर क्या बीतती है, उस पर आंख बंद कर लेते