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अध्यायः 10
अस्पृश्य क्या कहते हैं?
श्री गांधी से सावधान
I
कांग्रेस वाले अस्पृश्यों को यह पट्टठ्ठी पढ़ाने में कभी संकोच नहीं करते कि केवल श्री गांधी ही उनके संरक्षक हैं। कांग्रेसी भारत भर में घूम-घूम कर केवल श्री गांधी को ही अस्पृश्यों का संरक्षक होने का दावा करते हैं। यही नहीं इससे भी आगे बढ़कर वे अस्पृश्यों से यह कहते फिरते हैं कि वास्तविकता यही है कि श्री गांधी ही उनके संरक्षक हैं। जब वे उन्हें बहकाते हैं, तो उदाहरण देते हैं कि यदि अस्पृश्यों के अधिकारों के लिए कोई प्राणों की बाजी लगा सकता है, तो वह है केवल श्री गांधी_ उनके अतिरिक्त और कोई नहीं। वे निस्संकोच और बिना किसी पश्चाताप के उन अस्पृश्यों से कहते हैं कि पूना पैक्ट के अंतर्गत अस्पृश्यों को जो राजनीतिक अधिकार मिले हैं, वे श्री गांधी जी के प्रयत्नों का फल है। उदाहरण के लिए ऐसे प्रचार का एक उदाहरण मैं राय बहादुर मेहर चंद खन्ना का पेश करता हूं, ख्1, जिन्होंने पेशावर में 12-4-1945 को दलित वर्ग संघ के तत्वावधान में हुई अस्पृश्यों की सभा में कहा थाःµ
फ्तुम्हारे सबसे अच्छे मित्र महात्मा गांधी हैं, जिन्होंने तुम्हारे अधिकारों के
लिए अनशन किया और पूना पैक्ट के अंतर्गत मताधिकार, स्थानीय निकायों
और विधानमंडलों में प्रतिनिधित्व और भोजन का अधिकार दिलाया। आप में
से कुछ लोग डॉ. अम्बेडकर के पीछे दौड़ रहे हैं, जिसे साम्राज्यवादी ब्रिटिश
सरकार ने खड़ा किया है और जो आपको ब्रिटिश साम्राज्य के हाथ मजबूत
करने के लिए इस्तेमाल करते हैं ताकि अंग्रेज भारत में फूट डालकर शासन
करते रहें। मैं आपके हित में आप लोगों से अपील करता हूं कि आप अपने
नेता और अपने वास्तविक शुभचिंतक मित्र के अंतर को पहचानें।य्
- फ्री प्रेस जनरल, दिनांक 14.4.1945