10. अस्पृश्य क्या कहते हैं? - Page 263

248 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

रामायण में कैसे अपनी नाव में बिठा कर राम को गंगा पार करता है। आज

यह कल्पना में नहीं आता कि कोई मानव इसलिए अस्पृश्य माना जाए कि

उसकी आत्मा दूषित है। वास्तव में जैसा कि हम ईश्वर को तमाम पापों से

शुद्ध करने वाला कहते हैं, इससे स्पष्ट है कि हिंदू धर्म में यह मानना पाप है

कि कोई जन्म से दूषित अथवा अस्पृश्य है। इसीलिए मैं हमेशा से इसे पाप

कहता रहा हूं। मैं इस बात का ढोंग नहीं करता कि बारह वर्ष की अवस्था

में यह बात मेरे दिल में बैठ गई थी। परंतु मैं जोर देकर कहता हूं कि मैंने

उस समय भी अस्पृश्यता को पाप समझा था। मैंने वैष्णवों और पाखंडी

हिंदुओं को जानकारी के लिए वह कहानी बतलाई है।य्

निस्सन्देह यह जानकारी बड़ी दिलचस्प है कि घोर अंधविश्वास के युग में श्री गांधी को यह आभास हुआ कि अस्पृश्यता पाप है और वह भी बारह वर्ष की अवस्था में। कुछ भी हो आज अस्पृश्य यह जानना चाहते हैं कि इस बुराई को श्री गांधी ने दूर करने के लिए क्या किया? मैं इस संबंध में मद्रास के प्रकाशक टैगोर एंड कंपनी द्वारा प्रकाशित श्री गांधी के जीवन संबंधी एक टिप्पण का उद्धरण नीचे प्रस्तुत कर रहा हूं, जिसे उन्होंने 1922 में यंग इंडिया नामक अपने खंड में प्रकाशित किया था, जिसमें यह दर्शाया गया है कि जब से श्री गांधी ने सार्वजनि क्षेत्र में कदम रखा उनके कौन-कौन से मुख्य कार्य रहे हैं। टिप्पण में कहा गया हैः

फ्मोहनदास करमचंद गांधी 2 अक्तूबर, 1869 को पैदा हुए थे। वह जाति

के बनिया थे। वह पोरबंदर राजकोट काठियावाड़ तथा अन्य राज्यों के दीवान

करमचंद गांधी के पुत्र थे। उन्हें काठियावाड़ हाई स्कूल में शिक्षा मिली।

उसके बाद लंदन और इनर टैम्पुल में शिक्षा मिली। लंदन से वापसी के

बाद वह बम्बई हाईकोर्ट में वकालत करने के लिए दाखिल हुए। लीगल

मिशन में वह नैटाल और तत्पश्चात् ट्रांसवाल गए। नैटाल सुप्रीम कोर्ट में

वकालत करने के लिए प्रवेश लिया और वहीं पर बसने का इरादा किया।

वहां 1894 में उन्होंने नैटाल इंडियन कांग्रेस की नींव डाली। वर्ष 1895 में

भारत वापस आए। उन्होंने नैटाल और ट्रांसवाल में भारतीयों के पक्ष में भारत

में आंदोलन चलाया। डरबन वापस गए। आंग्ल बेयर युद्ध 1899 में इंडियन

एंबुलैंस कोर का नेतृत्व किया। वर्ष 1909 में भारत वापस आए और स्वास्थ्य

लाभ किया। मिस्टर चेम्बरलेन के समक्ष दक्षिणी अफ्रीका के भारतीयों की

कठिनाइयों के विषय में विचार प्रस्तुत करने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व करने के लिए पुनः दक्षिण अफ्रीका