10. अस्पृश्य क्या कहते हैं? - Page 264

अस्पृश्य क्या कहते हैं?

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वापस गए। ट्रांसवाल ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन की नींव डाली और उनके

आनरेरी सेक्रेटरी और मुख्य कानूनी सलाहकार बने। वर्ष 1903 में इंडियन

ओपिनियन की नींव डाली। 1906 में स्ट्रेचर नियरर कोर का नेतृत्व किया।

ऐंटी ऐशियाटिक एक्ट, 1906 के विरोध में आंदोलन किया। अधिनियम वापसी

के बारे में प्रतिनिधिमंडल में इंग्लैंड गए। एक्ट के विरोध में पैसिव रेसिस्टेंट

मूवमेंट चलाया। जनरल स्मट और गांधी जी के मध्य समझौता हुआ। बाद में

स्पट ने समझौते को नामंजूर कर दिया और पैसिव रेसिस्टेंट को पुनः लागू

किया। कानून तोड़ने के अपराध में, उन्हें दो बार बंदी बनाया गया। वर्ष 1909

में पुनः इंग्लैंड में ब्रिटिश जनता के समक्ष भारतीय पक्ष प्रस्तुत करने गए।

गोखले ने 1911 में प्रॉविजनल सेटेलमेंट के लिए दक्षिण अफ्रीका की यात्रा

की। सरकार द्वारा वर्ष 1911 के समझौता के न मानने पर पेसिव रेसिस्टेंट

मूवमेंट को पुनः चालू किया। अंतिम समझौता 1914 में हुआ। इंग्लैंड गए।

1914 में इंडियन एम्बुलेंस कोर की स्थापना की।य्

उनके जीवन संबंधी इस टिप्पण से स्पष्ट हो जाता है कि श्री गांधी ने अपना सार्वजनिक जीवन 1894 से आरम्भ किया और जब उन्होंने नैटाल इंडियन कांग्रेस की नींव डाली थी। वर्ष 1894 से 1915 तक वह दक्षिण अफ्रीका में रहे। उस अवधि में उन्होंने अस्पृश्यों के विषय में कभी सोचा तक नहीं और ऊखा की भी कोई

खैर-खबर नहीं ली।

श्री गांधी 1915 में भारत वापस आए। क्या तब उन्होने अस्पृश्यों की कोई चिंता की? मैं उपरोक्त जीवन वृत्त से ही निम्नलिखित अंश प्रस्तुत कर रहा हूँः-

फ्1915 में भारत वापस आए। अहमदाबाद में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना

की। 1917 में चंपारण के श्रमिकों की समस्या हल करने के लिए भाग

लिया। खेड़ा अकाल और 1919 में अहमदाबाद में मिल हड़ताल में भाग

लिया। रोलट एक्ट और 1919 के सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया, जब

वह दिल्ली जा रहे थे तो रास्ते में ही कोसी में गिरफतार कर लिए गए और

बम्बई वापस भेज दिए गए। पंजाब में 1919 में अशांति और अधिकारियों

द्वारा अत्याचार हुए। पंजाब में हुए अत्याचारों की जांच करने के लिए

कांग्रेस कमेटी के सदस्य बनाए गए, मुखालफत आंदोलन में भाग लिया।

1920 में असहयोग आंदोलन आरंभ किया, मई 1921 में लॉर्ड रीडिंग से

विचार-विमर्श किया। 1921 में कांग्रेस अधिवेशन के मुख्य कार्य संचालक

बनाए गए। फरवरी 1922 में चौरी चौरा आंदोलन के कारण सविनय अवज्ञा