अस्पृश्य क्या कहते हैं?
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उन्होंने उन प्रतिक्रियावादी विरोधियों का पक्ष लिया, जो स्वामी श्रद्धानंद के विरुद्ध थे यद्यपि वे जानते थे कि वे विरोधी लोग अस्पृश्यों के हितों में कुछ भी नहीं करने देना चाहते। 1921 में बारदौली कार्यक्रम के संबंध में गांधी जी ने जो किया उसके बारे में यही कुछ कहना है। ख्1,
श्री गांधी ने 1922 के बाद अस्पृश्यों के लिए क्या किया? गांधीजी का जीवनवृत्त जो पहले उद्धृत किया जा चुका है 1922 में छपा था। यह आवश्यक है कि उस विवरण को पूरा करने के लिए निम्नांकित विवरण भी जोड़ दिया जाएःµ
फ्वर्ष 1924 में वह जेल से रिहा किए गए। उन्होंने कांग्रेस के उन दो गुटों
में समझौता कराया जो श्री गांधी की अनुपस्थिति में काउंसिल प्रवेश बनाम
रचनात्मक कार्यक्रम का मामला उठा कर आपस में लड़ रहे थे। 1929
में भारतीय राजनीति का लक्ष्य पूर्ण स्वराज्य घोषित किया गया। 1930 में
सविनय अवज्ञा आंदोलन आरंभ किया गया। 1931 में लंदन में होने वाले
गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने के लिए गए, 1932 में
गिरफतार हो गए। शासन द्वारा घोषित सांप्रदायिक मतदान के विरुद्ध आमरण
अनशन किया। 1933 में पूना पैक्ट हुआ और अस्पृश्यों के मंदिर प्रवेश के
लिए योजना बनाई। हरिजन सेवक संघ की स्थापना की। 1934 में कांग्रेस
की सदस्यता त्याग दी। 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन चलाया और
गिरफतार हुए। 1943 में अनशन किया और छोड़ दिए गए। 1944 में लॉर्ड
वावेल से पत्र व्यवहार किया और 8 अगस्त, 1942 के प्रस्ताव की व्याख्या
की। 1945 में कस्तूरबा फंड चलाया।य्
1924 में श्री गांधी अस्पृश्यता मिटाने के लिए बहुत कुछ कर सकते थे और अपने आंदोलन को प्रभावकारी बना सकते थे। परंतु श्री गांधी ने क्या किया?
कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 1922 से 1924 के बीच का समय काफी महत्वपूर्ण रहा है। कांग्रेस द्वारा असहयोग आंदोलन की योजना सितम्बर 1920 में कलकत्ता में विशेष अधिवेशन में स्वीकार की गई थी। असहयोग आंदोलन की योजना के अनुसार पांच प्रकार से बहिष्कार करना था, जैसे विधायिका का बहिष्कार और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार आदि। बुद्धिजीवी वर्ग ने असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का विरोध किया था, जैसे बिपिन चंद्र पाल, चितरंजन दास, लाल लाजपत राय परंतु उनके विरोध करने पर भी प्रस्ताव पास हो गया। कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन दिसंबर
- विवरण के लिए देखिए अध्याय 2