10. अस्पृश्य क्या कहते हैं? - Page 267

252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

1920 में नागपुर में हुआ। असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव पर वहां भी विवाद हुआ। वहां भी वही अजीब स्थिति उत्पन्न हुई। प्रस्ताव चितरंजन दास द्वारा लाया गया और उसका समर्थन लाला लाजपत राय ने किया। ख्1, 1921 में असहयोग आंदोलन का सूत्रपात हुआ। 19 मार्च, 1922 को श्री गांधी पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया और उन्हें 6 वर्ष की सजा हुई। श्री गांधी को तुरंत जेल के अंदर कर दिया गया। चितरंजन दास ने विधायिका के बहिष्कार का आंदोलन छेड़ा। वल्लभ भाई पटेल, पंडित मोती लाल नेहरू और पंडित मालवीय ने उनका साथ दिया। श्री गांधी के उन अनुयायियों द्वारा इसका विरोध किया गया जो कलकत्ता और नागपुर में असहयोग आंदोलन के विषय में पास किए गए प्रस्ताव में किसी प्रकार की कटौती करने के लिए तैयार नहीं थे। इसमें कांग्रेस में फूट पड़ गई। वर्ष 1924 में अस्वस्थता के कारण श्री गांधी समय से पहले ही जेल से छोड़ दिए गए।

श्री गांधी ने जेल से आकर देखा कि विधायिका के बहिष्कार के प्रश्न को लेकर कांग्रेस दो धड़ों में बंट गई है। झगड़ा इतना बढ़ गया था कि दोनों दल एक दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे थे। श्री गांधी ने अनुभव किया कि यदि यों ही खींचतान चलती रही, तो कांग्रेस कमजोर हो जाएगी, इसलिए वह इस मतभेद की खाई को पाटना चाहते थे। कोई भी दल हार मारने को तैयार नहीं था। एक दूसरे के विरोध में बयान जारी होते थे। अंततः श्री गांधी ने दोनों पक्षों के मध्य सुलह के लिए कुछ ऐसे प्रस्ताव रखे, जिन्हें दोनों पक्षों ने स्वीकार कर लिया। वे प्रस्ताव इस प्रकार के थे, जिन्हें दोनों पक्षों ने प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर लिया। जो काउंसिल प्रवेश के पक्षधर थे, उन्हें प्रसन्न करने के लिए श्री गांधी ने प्रस्ताव किया कि कांग्रेस कार्यप्रणाली की सीमा के अंदर ही विधायिका प्रवेश करने वालों को अपने को सीमित करना चाहिए और जो प्रवेश के विरुद्ध थे, उनसे कहा कि वे विधायिका प्रवेश के विरुद्ध किए जा रहे अपने प्रचार को बंद करें। प्रवेश के विरोधियों के लिए श्री गांधी ने प्रस्ताव किया कि कांग्रेस का इसके लिए नए मताधिकार का आधार बनाना चाहिए। - (1) कांग्रेसी सदस्य चार आना चंदा देने के बजाए दो हजार गज सूत हाथ से कातें और हाथ से बुने वस्त्रों का प्रयोग करें। इसका उल्लंघन करने वाले अपने आप कांग्रेस की सदस्यता के अयोग्य हो जाएंगे। (2) पांच प्रकार के बहिष्कारों को कार्यान्वित करना, अर्थात् विदेशी कपड़ों का बहिष्कार, सरकारी न्यायालयों का बहिष्कार, स्कूलों एवं कॉलेजों का बहिष्कार और अपराधियों का बहिष्कार।

  1. कांग्रेस के इतिहासकार श्री पट्टठ्ठाभि सीमाराम्मैया ने कांग्रेस के इतिहास के पृष्ठ 347 पर लिखा है कि

चितरंजन दास पूर्वी बंगाल और असम से अपने खर्चे से 250 प्रतिनिधि लाए थे और जो कुछ कलकत्ता

अधिवेशन में हुआ था उस पर पानी फेरने के लिए ही उन्होंने अपनी जेब से 36000 रुपए खर्च किए

थे। उस समय चितरंजन दास के पक्षधर तथा उनके विरोधी जितेन्द्र लाल बनर्जी के पक्षधरों में झड़पें

भी हुई थीं।