10. अस्पृश्य क्या कहते हैं? - Page 269

254 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अस्पृश्यों ने की थी। अस्पृश्यों के सत्याग्रह का संचालन अस्पृश्यों के धन से होता था और अस्पृश्यों द्वारा ही उनका नेतृत्व किया जाता था। परंतु तब भी अस्पृश्यों को श्री गांधी का नैतिक समर्थन नहीं मिल सका। वास्तव में समर्थन देने का श्री गांधी को बहुत अच्छा अवसर मिला था, क्योंकि सत्याग्रह का हथियार - जिसका ध्येय स्वयं कष्ट उठाकर विरोधियों के दिल पिघलाना था - ऐसा हथियार था, जिसका अनुसरण श्री गांधी ने किया था और उन्होंने स्वराज्य प्राप्ति के लिए अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध कांग्रेस का नेतृत्व करते समय उस हथियार का प्रयोग किया था। स्वभावतः अस्पृश्यों ने सार्वजनिक कुओं और हिंदू मंदिरों में समान अधिकार पाने के लिए हिंदुओं के विरुद्ध जो सत्याग्रह छेड़ा था, उसमें उन्हें श्री गांधी के समर्थन की बड़ी आशा थी। परंतु श्री गांधी ने सत्याग्रह को कोई समर्थन नहीं दिया। उन्होंने केवल समर्थन देने से इंकार ही नहीं किया वरन् उल्टे बड़े शब्दों में उस सत्याग्रह की निंदा की।

इस संबंध में दो उनके अनोखे उपायों का उल्लेख करना ठीक होगा जिनसे मानवीय गलतियों को सुधारा जा सकता है। ऐसे उपायों का आविष्कार और उनकी सफलता का श्रेय श्री गांधी को है। पहला उपाय है, सत्याग्रह। श्री गांधी ने ब्रिटिश सरकार की राजनीतिक विसंगतियों को दूर करने के विरुद्ध कई बार सत्याग्रह किया। परंतु श्री गांधी ने अस्पृश्यों के लिए सार्वजनिक कुएं और मंदिर खोलने के लिए हिंदुओं के विरुद्ध सत्याग्रह का अस्त्र नहीं छोड़ा। आमरण अनशन श्री गांधी का दूसरा हथियार है। ऐसा कहा जाता है कि श्री गांधी ने कुल मिलाकर 21 अनशन किए थे। कुछ हिंदू मुस्लिम एकता के लिए और अधिकांश अपने आश्रम में रहने वालों द्वारा किए गए अनैतिक आचरण पर प्रायश्चित करने के संबंध में थे। एक सत्याग्रह बम्बई की सरकार के उस आदेश के विरोध में था, जिसे बम्बई सरकार ने जेल के कैदी श्री पटवर्धन द्वारा मांग करने पर भी उसे झाडू लगाने का काम देने से इंकार कर दिया गया था। इन 21 अनशनों में एक भी अनश्न अस्पृश्यता निवारण के लिए नहीं किया गया। यह महत्वपूर्ण तथ्य है।

1930 में गोलमेज सम्मेलन हुआ। गांधी जी सम्मेलन की कार्यवाही में 1931 में शामिल हुए। सम्मेलन भारत के स्वायत्त शासन के लिए संविधान का निर्माण करने के मूल प्रश्न पर विचार के लिए बुलाया गया था। ख्1, यह सर्वसम्मति से निश्चय किया गया था कि यदि भारत को स्वायत्तशासी सरकार बनानी है, तो यह सरकार जनता की हो, जनता द्वारा शासित हो और जनता के लिए हो। सभी लोग इस बात से सहमत थे कि वास्तविक रूप से सरकार वही ठीक होगी जो सकरार जनता द्वारा चलाई जाए, जनता की हो और जनता के लिए हो। समस्या यह थी कि ऐसे देश में जनता द्वारा

  1. विवरण के लिए देखिये अध्याय 3।