1. अनोखी घटना - Page 28

अनोखी घटना

13

अधिवेशन आयोजित किए जाएं जिनमें हमारे समाज के स्तर तथा हमारे सामाजिक रीति-रिवाजों में सुधार करने के लिए विचार किया जाए तथा आवश्यक उपाय किए जाएं तथा कांफ्रेंस की प्रांतीय उपसमितियां गठित की जाएं। कान्फ्रेंस में लंबी समुद्री यात्राओं में फिजूलखर्ची, विवाहों में फिजूलखर्ची रोकना, विवाह की न्यूनतम आयु का निर्धारण, जवान विधवाओं का पुनर्विवाह, जवान लड़कियों का वृद्धों के साथ बेमेल विवाह जैसी बुराइयां, अनमेल विवाह, एक ही जाति की उपजातियों में अंतर्विवाह जैसे विषयों पर विचार किया गया और ऐसे निर्णय लेने पर आम सहमति हुई।

विभिन्न सामाजिक प्रश्नों पर विचार करने के लिए अलग-अलग उप-समितियों का गठन करने पर विचार हुआ और यह बात उन उपसमितियों पर छोड़ दी गई कि वे इन सुधारों को लागू करने के लिए मौलिक सिद्धांत प्रतिपादित करें तथा उन सिद्धांतों के उल्लंघन के लिए दंड विधान बनाएं। इस दंड व्यवस्था से सहमत एवं प्रतिबद्ध सोशल रिफार्म पार्टी के सदस्य इन नियमों को (1) स्वयं उपसमितियों द्वारा या (2) जहां कहीं संभव हो, धर्म गुरुओं के प्रभाव के माध्यम से या (3) दीवानी न्यायालयों के माध्यम से लागू कराते हैं और यदि कुछ नहीं तो सरकार से लिखित में यह अनुरोध किया जा सकता है कि इन समितियों को अधिकार दे दिया जाए कि वे अपने प्रतिज्ञाबद्ध सदस्यों के माध्यम से इन नियमों को लागू करा सकें।

सामाजिक बुराइयों से ग्रस्त हिंदू समाज की अनेक सामाजिक समस्याओं पर विचार करने हेतु सोशल रिफार्म पार्टी द्वारा अलग संगठन बनाए जाने पर उन्हें इस बात से गहरा असंतोष हुआ कि कांग्रेस ने सामाजिक समस्या से बिल्कुल हाथ खींच लिया है। इनमें से कुछ लोग तो इसको एक मुद्दा बनाने के लिए आतुर थे कि राजनीतिक सुधारों से पहले सामाजिक सुधार होना आवश्यक हो और उन्होंने इस आशय का फैसला लिए जाने पर जोर दिया। इस विचार के समर्थक उनके बहुत से मित्र थे। उन समर्थकों में भारत सरकार भी थी। वायसराय की एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य सर आकलैंड कालविन ने बहुत ही साफ और ज़ोरदार तरीके से स्पष्ट किया कि भारतीयों को प्राथमिकता के तौर पर सामाजिक सुधार पर ध्यान देना चाहिए फ्न कि अंग्रेजों को यह सिखाने का प्रयास करना चाहिए कि उनका भारत सरकार के प्रति क्या कर्तव्य है।य्

इस प्रकार कांग्रेस अध्यक्षों के भाषणों में समाज सुधार की बात का सरलता से समझा जा सकता है। सामाजिक बुराइयों को दूर करने की समस्या से कांग्रेस का अपने को अलग करने के विरोध में सोशल रिफार्म पार्टी द्वारा की गई आलोचना का यह उत्तर हो सकता है। इस दूसरे प्रश्न का उत्तर कि 1895 के बाद किसी भी कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने अभिभाषण में सामाजिक सुधार का जिक्र क्यों नहीं किया, यह है