10. अस्पृश्य क्या कहते हैं? - Page 280

अस्पृश्य क्या कहते हैं?

265

कोई गलत चाल चल दी है, तो उनकी सारी बहादुरी छूमंतर हो गई। श्री गांधी ने यह कह कर आमरण अनशन आरंभ किया था कि जब तक अस्पृश्यों को दिया गया संरक्षण पूर्णतया वापस नहीं लिया जाता और बिना अधिकारों के तथा बिना मान्यता दिए उन्हें पूर्णतया निस्सहाय अवस्था में नहीं छोड़ दिया जाता, तब तक मैं आमरण अनशन पर रहूंगा। वही श्री गांधी कातर स्वर में कह रहे थेः फ्मेरा जीवन तुम्हारे हाथों में है, क्या तुम मुझे नहीं बचाओगे?य् श्री गांधी ने पूना पैक्ट पर झटपट हस्ताक्षर कर दिए, यद्यपि उस समझौते में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए निर्णय को रद्द नहीं किया गया था, जैसा कि श्री गांधी ने मांग की थी, वरन् कुछ और तथा भिन्न प्रकार के संवैधानिक संरक्षण दे दिए गए थे। वह समझाता इस बात का पक्का प्रमाण है कि एक रणबांकुरा रणछोड़दास बन गया। उसे अपने प्राणों और सम्मान को बचाने की व्याकुलता ने घेर लिया।

श्री गांधी के उस आमरण अनशन में कोई शूरवीरता नहीं थी। यह उनका बहुत ही अनुचित और छिछोरा कार्य था। यह कृत्य अस्पृश्यों के विरुद्ध था और निस्सहाय लोगों के विरुद्ध बहुत ही खराब धींगामुश्ती थी जिसका उद्देश्य उन्हें ऐसे संवैधानिक संरक्षणों से वंचित करना था, जो उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए फैसले से मिले थे और उन्हें हिदुओं की दया पर छोड़ देना था। श्री गांधी का यह कृत्य घृणित और दुष्टता से भरा हुआ था, फिर अस्पृश्य ऐसे मनुष्य को ईमानदार और निष्कपट कैसे कह सकते हैं?

श्री गांधी ने आमरण अनशन के बाद पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर किए। लोग कहते हैं कि श्री गांधी गंभीरता से विश्वास करते थे कि अस्पृश्यों के लिए राजनीतिक संरक्षण हानिकारक है। परंतु वह व्यक्ति कैसे ईमानदार और निष्कपट हो सकता है, जिसने अस्पृश्यों की राजनीतिक मांग का विरोध किया हो, जो अस्पृश्यों को किनारे करने के लिए मुसलमानों को साथ लेने के लिए तैयार हो जाए, जिसने आमरण अनशन किया और अंत में उन्हीं मांगों को मान लिया - क्योंकि पूना पैक्ट और सांप्रदायिक फैसले में कोई अधिक अंतर नहीं है - जब उसे ज्ञात हो जाए कि विरोध करने से कोई लाभ नहीं होगा और विरोध भी सफल नहीं होगा - तो ऐसे मनुष्य को ईमानदार और निष्कपट कैसे कहा जा सकता है? एक ईमानदार और निष्कपट मनुष्य अस्पृश्यों की मांगों को, जिन्हें किसी समय वह हानिकारक मानता था वही उन्हें हानिरहित कैसे मान सकता है?

क्या अस्पृश्य श्री गांधी को अपना मित्र तथा सहयोगी मान सकते हैं? उत्तर नकारात्मक है। वे उन्हें अपना मित्र बिल्कुल नहीं मानते। और मान भी कैसे सकते हैं? ऐसा हो सकता है कि श्री गांधी ईमानदारी से विश्वास करते हों कि अस्पृश्यों