10. अस्पृश्य क्या कहते हैं? - Page 285

270 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कुओं से पानी लेने के लिए हिंदुओं के विरुद्ध सत्याग्रह आरंभ किया, तो उन्हें आशा थी कि उस सत्याग्रह में श्री गांधी का आशीर्वाद उन्हें मिलेगा, क्योंकि गलतियों को सुधारने का हथियार सत्याग्रह श्री गांधी का ही हथियार था। जब सत्याग्रह के लिए श्री गांधी से समर्थन करने की अपील की गई तो श्री गांधी ने हिंदुओं के विरुद्ध छेड़े गए सत्याग्रह अभियान की निंदा का बयान जारी करके अस्पृश्यों को आश्चर्य में डाल दिया। उस विषय में श्री गांधी द्वारा दिया गया तर्क बहुत अजीब था। श्री गांधी ने अपने बयान में कहा था कि सत्याग्रह हथियार का प्रयोग केवल विदेशियों के विरुद्ध किया जाए। अपने ही भाइयों अथवा देशवासियों के विरुद्ध नहीं। क्योंकि हिंदू अस्पृश्यों के भाई हैं और अस्पृश्यों के साथ ही इसी देश के वासी हैं वे सत्याग्रह अधिकार से वंचित कर दिए गए। एक धर्मात्मा के ऐसे हास्यास्पद कथन को श्री गांधी ने अपने ही हथियार सत्याग्रह को बकवास साबित कर दिया। श्री गांधी ने ऐसा क्यों किया? केवल इसलिए कि वह हिंदुओं को नाराज करना और उत्तेजित करना नहीं चाहते थे।

दूसरे प्रमाण के तौर पर मैं कविता की घटना का उल्लेख करना चाहूंगा। कविता अहमदाबाद में एक गांव है। वर्ष 1935 में अस्पृश्यों ने उस गांव के हिंदुओं से मांग की कि अन्य हिंदू बच्चों के साथ-साथ अस्पृश्यों के बच्चों को भी गांव के स्कूल में भरती किया जाए। इस पर चिढ़ कर हिंदुओं ने बदले में अस्पृश्यों का पूर्ण सामाजिक बहिष्कार कर दिया। इस बहिष्कार से संबंधित घटनाएं श्री ए.वी. ठक्कर द्वारा रिपोर्ट में वर्णित की गई थीं, जो अस्पृश्यों की ओर से मध्यस्थता करने के लिए कविता गए थे। उन्होंने जो कहानी सुनाई वह इस प्रकार थीःµ

फ्एसोसिएटेड प्रेस ने 10 तारीख को घोषित किया कि कविता के सवर्ण हिंदू

हरिजन बच्चों को कविता गांव के स्कूल में भरती करने के विषय में सहमत

हो गए हैं। अहमदाबाद के हरिजन सेवक संघ के मंत्री द्वारा 13 तारीख को

इसका प्रतिवाद किया गया। मंत्री ने अपने बयान में कहा था कि हरिजनों ने

उस स्कूल में अपने बच्चे न भेजने का निर्णय लिया है। ऐसा निर्णय उन्होंने

अपनी इच्छा से नहीं लिया था, वरन् सवर्ण हिंदुओं द्वारा ऐसा बयान देने

के लिए उन्हें विवश किया गया था। इस मामले में गांव के मरासियाओं ने,

जिन्होंने गांव के गरीब हरिजनों के विरुद्ध सामाजिक बहिष्कार की घोषणा

की थी - गरीब हरिजन, जुलाहा, चमार और दूसरे लोग थे, जिनकी संख्या

100 परिवारों से अधिक की थी। वे खेतों में मेहनत करने से वंचित कर

दिए गए थे। चरागाहों में उनके जानवर घास चरने नहीं जा सकते थे और