272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
व्यवहार सहना पड़ा है। यदि लोग रोजगार की तलाश में दूसरे स्थान पर चले
जाते हैं तो आत्म-सम्मान की तलाश में लोगों को यह अवश्य ही कर देना
चाहिए। मैं आशा करता हूं कि हरिजनों के हितैषी कविता को छोड़ने में,
जहां उनका आदर नहीं होता उन गरीब परिवारों की मदद करेंगे।य्
श्री गांधी ने कविता के अस्पृश्यों को अपनी जन्मभूमि त्यागने की सलाह दी। परंतु श्री गांधी ने श्री ठक्कर को यह सलाह क्यों नहीं दी कि वह कविता के हिंदुओं पर मुकदमा चलवाएं और अस्पृश्यों को अपने अधिकार प्राप्त करने में पूरी सहायता करें? अस्पृश्यों के उत्थान के लिए यह कुछ कर सकते, परंतु हिंदुओं को नाराज करके नहीं। अस्पृश्यों के उत्थान के लिए श्री गांधी जैसा मनुष्य क्या भलाई का कार्य कर सकता है? इस सबसे स्पष्ट है कि श्री गांधी हिंदुओं के भले बनकर ही रहना चाहते हैं। इसीलिए उन्होंने हिंदुओं के विरुद्ध छेड़े गए सत्याग्रह का विरोध किया। यही कारण है कि श्री गांधी ने अस्पृश्यों की मांगों का पूरी शक्ति के साथ विरोध किया, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि अस्पृश्यों की मांगें उनके उद्देश्यों के विरुद्ध हैं। श्री गांधी हिंदुओं के भले बने रहने के इतने इच्छुक हैं कि उन्हें अस्पृश्यों की भलाई की कोई चिंता नहीं है। यही कारण है कि श्री गांधी का अस्पृश्यता निवारण का कार्यक्रम केवल जबानी जमा खर्च है। उसका कोई सार्थक फल नहीं है।
तीसरा कारण यह है कि श्री गांधी यह नहीं देखना चाहते कि अस्पृश्य संगठित हों और शक्तिशाली बनें। उन्हें डर है कि संगठित होकर शक्तिशाली बनकर हिंदुओं की दासता से मुक्त हो जाएंगे और हिंदुओं की ऊंच-नीच की व्यवस्था को कमजोर कर देंगे। हरिजन सेवक संघ के कार्यकलाप इस बात के ज्वलंत उदाहरण हैं। हरिजन सेवक संघ का पूरा उद्देश्य अस्पृश्यों में अपने हिंदू स्वामियों के प्रति दास मनोवृत्ति तथा परावलंबन का भाव पैदा करना था। चाहे जिस दृष्टिकोण से संघ की परीक्षा की जाए उसका मुख्य उद्देश्य अस्पृश्यों में मानसिक दासता पैदा करने के अतिरिक्त कुछ नहीं है।
हरिजन सेवक संघ का कार्य अस्पृश्यों को लालच देकर हिंदुओं की गुलामी के जाल में फंसाए रहना है जैसे कि पौराणिक कथा की पिशाचिनी पूतना का वर्णन भागवत में किया गया है। मथुरा का राजा कंस कृष्ण को मारना चाहता था, क्योंकि ज्योतिषियों ने उसे बतलाया था कि वह कृष्ण के हाथों मारा जाएगा। यह जानकर कि कृष्ण का जन्म हो गया कंस ने पूतना से कृष्ण को उसके शैशव काल में ही मार डालने की तरकीब करने को कहा। पूतना ने एक सुंदरी का रूप धारण किया और यशोदा के पास गई। उसने अपने स्तनों में जहर लगा दिया था और धाय की तरह कृष्ण को दूध पिला कर उन्हें मारने का मौका तलाश करने लगी। शेष कथानक को