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अनोखी घटना

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यह भी निश्चय हो गया कि कांग्रेस कोई भी सामाजिक सुधार वह चाहे जितना ही आवश्यक ख्1, हो उस पर कोई विचार नहीं करेगी। यह इस बात का स्पष्टीकरण है कि 1895 के बाद किसी भी कांग्रेस अध्यक्ष ने समाज सुधार की समस्या का अपने अध्यक्षीय भाषण में कभी उल्लेख नहीं किया। वर्ष 1895 में ही कांग्रेस पूर्णतया राजनैतिक दल बन गई और उसकी सामाजिक बुराइयों को मिटाने के प्रति कोई इच्छा नहीं रही।

III

इस पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने वर्ष 1917 में दलित वर्ग के विषय में एक प्रस्ताव पारित किया जो वास्तव में अनोखी घटना थी। इससे पहले कांग्रेस ने इस प्रकार का कोई प्रस्ताव कभी पारित नहीं किया था यद्यपि उसे कार्य करते हुए बत्तीस वर्ष हो गए थे। ऐसा करना कांग्रेस की घोषित नीति के विरुद्ध था।

कांग्रेस ने वर्ष 1917 में ऐसा प्रस्ताव पास करना क्यों आवश्यक समझा? अस्पृश्यों के लिए उसमें यह चेतना अथवा ऐसा संज्ञान कैसे आया? कांग्रेस किसको धोखा देना चाहती थी? क्या यह उसके दृष्टिकोण में परिवर्तन के कारण हुआ था अथवा उसकी कोई गूढ़ चाल थी? इन प्रश्नों के उत्तर के लिए हमें दलित वर्ग द्वारा वर्ष 1917 में बंबई नगर में दो विभिन्न अध्यक्षों की अध्यक्षता में हुई अलग-अलग सभाओं में पारित निम्नलिखित दो प्रस्तावों पर ध्यान देना होगा। इनमें पहली सभा 11 नवंबर, 1917 को श्री नारायण चन्द्रावरकर की अध्यक्षता में हुई थी। उस सभा में निम्नलिखित प्रस्ताव ख्2, पारित किए गए थे µ

फ्प्रथम प्रस्ताव µ ब्रिटिश सरकार के प्रति राजभक्ति तथा मित्र राष्ट्रों की विजय

की कामना के लिए प्रार्थना।य् उस समय प्रथम विश्व युद्ध हो रहा था।

फ्दूसरा प्रस्ताव µ बैठक में पूर्ण बहुमत से पास किया गया जिसका लगभग

एक दर्जन सदस्यों द्वारा विरोध किया गया। भारतीय प्रशासन में सुधार लाने

सम्बन्धी योजना का अनुमोदन किया गया। इंडियन नेशनल कांग्रेस तथा ऑल

इंडिया मुस्लिम लीग ने उनकी सिफारिश की।य्

  1. कुछ प्रसिद्ध समाज सुधारकों ने कांग्रेस में सोशल रिफार्म पार्टी के विरोधियों द्वारा कांफ्रेंस के खिलाफ

किए गए विद्रोह का स्वागत किया। दीवान बहादुर आर. रघुनाथ राव ने श्री रानाडे को पत्र लिखा कि

उन्हें इस बात की खुशी है कि सोशल कांफ्रेंस को पंडाल के उपयोग करने की अनुमति नहीं दी गई

क्योंकि कांग्रेस सोशल कांफ्रेंस के साथ-साथ अंग्रेजों पर जो काम करने का धोखे का जाल फेंक रही

थी उसका परदा हट जाता और अंग्रेज अब यह पूरी तौर से समझ लेते कि कांग्रेस वास्तव में सोशल

कांफ्रेंस के साथ मिलकर काम नहीं करेगी।

  1. प्रस्तावों के भाषण भारत में वाइसराय तथा राईट सम्मानीय सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया (1918)

को प्रस्तुत किए गए। (पार्लियामेंटरी पेपर सी.डी. 1978, पृ. 74-75)