11. गांधीवाद - Page 305

290 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उन्होंने कानून अपने हथों में ले लिया है और इतना अधीर हो उठे हैं कि

जिससे जो चाहते हैं वही कराते हैं। वे सामाजिक बहिष्कार का दुरुपयोग

कर रहे हैं और हिंसा का रास्ता अपना रहे हैं। ऐसी सूचना मिली है कि

जमींदारों को पानी भरने देना बंद कर दिया है। बाल काटना और बाकी पैसा

देकर प्राप्त सेवाएं भी बंद कर दी हैं। यहां तक कि उन पर जमींदारों का

लगान बाकी था, उसका भी भुगतान करना बंद कर दिया। किसान आंदोलन

ने असहयोग आंदोलन से प्रेरणा ली है, परंतु उनका आंदोलन उससे भिन्न

है। जब किसान आंदोलन चल पड़ा है, तो हमें उन्हें यह सलाह देने में कोई

हिचक नहीं कि वे सकरार को कर देना बंद कर दें। यह नहीं कहा जा

सकता कि असहयोग के किसी भी चरण पर जमींदारों को लगान देना बंद

कर दिया जाए। किसान आंदोलन किसानों का स्तर ऊंचा उठाने तथा उनके

और जमींदारों के बीच मधुर संबंध बनाए रखने तक सीमित रखना चाहिए।

किसानों को स्पष्ट सलाह दी जाती है कि वे जमींदारों के साथ किए गए

समझौते का पालन करें चाहे वह समझौता लिखित हो या परंपरागत। जहां

लिखित अथवा परंपरागत समझौते गलत तथा बुरे हों उन्हें बिना जमींदारों की

पूर्व सहमति के हिंसात्मक ढंग से तोड़ नहीं देना चिहए। प्रत्येक परिवर्तन

के लिए उन्हें जमींदारों से सौहार्दपूर्ण ढंग से बातचीत कर मामले सुलझाने

का प्रयत्न करना चाहिए।य्

श्री गांधी धनपतियों को हानि नहीं पहुंचाना चाहते। यहां तक कि वह उनके विरुद्ध आंदोलन का भी विरोध करते हैं। आर्थिक समानता के लिए उनमें कोई भावना नहीं है। धनी वर्ग का उल्लेख करते हुए श्री गांधी ने एक बार कहा था कि सोने का अंडा देने वाली मुर्गी का हनन नहीं करना चाहिए। मालिक, मजदूरों, धनी और निर्धन जमींदारों और किसानों तथा मालिकों और नौकरों के मध्य उठते आर्थिक झगड़ों को सुलझाने के लिए श्री गांधी का सरल नुस्खा है कि संपत्तिवान अपने को संपत्ति का न्यासी घोषित कर दें। मालिकों को उनकी संपत्ति के अधिकार से वंचित न किया जाए। धनवान जो कुछ करते हैं गरीबों के न्यासी के रूप में करते हैं। निस्संदेह न्यास स्वेच्छा से काम करने का आध्यात्मिक और नैतिक दायित्व है।

III

क्या आर्थिक समस्याओं पर गांधीवादी विश्लेषण में कोई नई बात है? क्या गांधीवादी अर्थव्यवस्था दोषरहित है? गांधीवाद साधारण मनुष्यों तथा निचले स्तर के लोगों में किस आशा का संचार करता है? क्या गांधीवाद साधारण मनुष्य को बेहतर जीवन,