गांधीवाद
291
सुखी-जीवन और संस्कृति तथा स्वतंत्रता के जीवन - स्वतंत्रता दरिद्रता से ही नहीं बल्कि क्षमतानुसार उत्थान और विकास की स्वतंत्रता का वचन देता है?
आर्थिक समस्याओं पर गांधीवादी विश्लेषण का सार, इसका उत्तरदायित्व मशीनों के सिर मढ़ देने और मशीनी संस्कृति को कोसने तक सीमित है। उनका तर्क है कि मशीनी और आधुनिक सभ्यता संपत्ति की व्यवस्था और नियंत्रण थोड़े से व्यक्तियों तक केंद्रित करने में सहायक है और लाखों मजदूरों वाली फैक्ट्रियों का माल इससे भी कम हाथों में महाजनी तथा बैंकों के नियंत्रण में सिमटा होने पर बड़े-बड़े कारखानों तथा मिलों के लाखों करोड़ों आदमी अपनी झोंपडि़यों के हजारों मील दूर उन बड़े कारखानों में अपना खून पसीना बहाते हैं अथवा उन मशीनों और आधुनिक सभ्यता के कारण काल के गाल में चले जाते हैं, अपाहिज और अयोग्य हो जाते हैं, जितने शायद युद्धों में घायल होने के कारण भी नहीं होते होंगे। बड़े-बड़े शहरों के विकास से और वहां बड़े कारखानों की चिमनियों से निकले धुएं, गंदगी, मशीनों की आवाजें, गंदी हवा, सूरज की धूप की कमी, बाह्य जीवन, मैली-कुचैली बस्तियां, अनाचार एवं अस्वाभाविक कारणों से परोक्ष अथवा अपरोक्ष रूप में उत्पन्न रोगों और शारीरिक अक्षमता के हौवे खड़ा करने वाले गांधीवाद के सभी तर्क घिसे-पिटे और पुराने तर्क हैं उनमें कोई नई बात नहीं है। मशीनों के विरुद्ध गांधीवाद के इन तर्कों में पाश्चात्य विद्वानों - रूसो, रस्किन, टाल्सटाय आदि के ही विचारों और शैलियों को केवल अपने शब्दों में दुहराया गया है।
गांधीवाद में जिन विचारों को समाहित किया गया है, वे विचार हमें आदिम युग की ओर ले जाते हैं। उनसे प्रकृति की ओर तथा वन्य जीवन की ओर वापस होने की प्रेरणा मिलती है। यदि उन विचारों में कोई अच्छी बात है, तो वह सादगी है। ऐसे साधारण विचार शाश्वत रहते हैं और ऐसे सीधे-सादे साधारण लोगों का बाहुल्य होता है, जो उपदेश सुनने को मिल जाते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि मनुष्यों की मूल प्रवृत्ति में व्यावहारिक ज्ञान भी होता है, जो कभी अंधा नहीं होता, इसलिए प्रगतिशील समाज ऐसे विचारों को भला क्यों शिरोधार्य करेगा?
गांधीवाद का आर्थिक दर्शन व्यर्थ का दिवास्वप्न है। माना जा सकता है कि मशीनरी और आधुनिक सभ्यता से बहुत दोष उत्पन्न हो गए हैं, परंतु ये दोष होना कोई तर्क नहीं है, क्योंकि बुराइयां मशीनों और आधुनिक सभ्यता के कारण नहीं हैं, बल्कि ऐसे गलत सामाजिक संगठन के कारण हैं, जिससे व्यक्तिक संपत्ति और लाभवृत्ति हावी हो गई है। यदि मशीनरी और आधुनिक सभ्यता से सभी लोगों को लाभ नहीं पहुंचा है, तो मशीनों तथा आधुनिक सभ्यता को दोषी ठहराना उचित तरीका नहीं है। सही