11. गांधीवाद - Page 307

292 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उपाय है, सामाजिक ढांचे में उचित परिवर्तन करना, ताकि मशीनों से हुआ लाभ मुट्टòी भर व्यक्तियों के हाथों में ही सीमित न रहकर सर्वसाधारण तक पहुंच सके।

गांधीवाद में साधारण मनुष्य को कोई आशा नहीं। इनमें साधारण मनुष्य की पशुओं से तुलना की जाती है। यह सच है कि पशुओं से मनुष्य का गहरा संबंध है। कुछ आवश्यकताएं उनमें समान हैं, जैसे फ्आहार, निद्रा, भय, मैथुनम चय् परंतु यह मानव के विशेष आचरण नहीं हैं। मानव के विशेष गुण हैं बौद्धिकता, जिसके कारण उसमें चिंतन-मनन और जिज्ञासा के भाव उत्पन्न होते हैं। वह ब्रह्मांड में सौंदर्य खोजता है, अपने जीवन का विकास करता है और जीवन के पशुतत्व पर नियंत्रण करता है। इस प्रकार चेतन जगत में मनुष्य का सर्वोच्च स्थान है। यदि यह सही है, तो उसका निष्कर्ष क्या है? निष्कर्ष यह है कि पाश्विक जीवन का लक्ष्य होता है शारीरिक आवश्यकताओं को प्राप्त करके ही संतुष्ट होना, परंतु मानव-जीवन का लक्ष्य इतने से ही न संतुष्ट होकर निरंतर बढ़ते रहना, जब तक कि वह आपके मानस-मंथन से मानवता के चरम लक्ष्य को न प्राप्त कर ले और उसका मानसिक उत्कर्ष न हो जाए। संक्षेप में यही कि पशु और मानव के बीच अंतर संस्कृति की परिणति है। पशु जगत के लिए सभ्यता संभव नहीं, परंतु मानव के लिए नितांत आवश्यक है। इसीलिए प्रत्येक मनुष्य संस्कृति की छाया में जीए। जिसका अर्थ है भौतिक आवश्यकताओं की संतुष्टि से ऊपर उठकर मानव का मानसिक विकास, ऐसा कैसे हो सकता है?

समाज और व्यक्ति दोनों के लिए सदा जीवित रहने और उत्तम रीति से जीने में अंतर बना रहता है। उत्तम जीवन के लिए भी जीवित रहना पड़ता है। मात्र जीने की अनिवार्य सुविधाएं जुटाने पर उसका जो समय और शक्ति लग जाती है, उससे वह उन गतिविधियों से वंचित रह जाता है, जिन्हें वह विशिष्ट रूप से मानव प्रकृति के लिए संभव कर सकता है, जो जीवन को सुसंस्कृत बनाती हैं। तब सुसंस्कृत जीवन कैसे संभव है? यह तब तक संभव नहीं, जब तक निश्चिंतता प्राप्त न हो, क्योंकि जब निश्चिंतता होगी, तभी वह सुसंस्कृत जीवन जी सकता है। सभी समस्याओं से बड़ी समस्या यही है कि प्रत्येक व्यक्ति कैसे निश्चिंत रहे। निश्चिंतता का क्या अर्थ है? निश्चिंतता इसी में है कि जीवन के भौतिक मूल्यों की प्राप्ति में उसे कम श्रम करना पड़े। निश्चिंतता कैसे संभव है? निश्चिंतता उस समय तक असंभव है, जब श्रम के क्षेत्र में कुछ साधन उपलब्ध न हों, ताकि मानव जीवन के लिए अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए श्रम की मात्रा घटाई जा सके। ऐसा श्रम कैसे कम हो सकता है? केवल तभी जब मानव के स्थान पर मशीन काम करे। निश्चिंतता के लिए कोई और साधन नहीं। इस तरह मशीनें और आधुनिक सभ्यता ही मानव को