11. गांधीवाद - Page 317

302 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

क्यों करते हैं कि यह सर्वोत्तम कार्य है और उसे करते रहने में किसी प्रकार की लज्जा का अनुभव नहीं करना चाहिए? इस प्रकार गांधीवाद द्वारा यह उपेदश कि संपत्ति का मोह त्याग और गरीबी केवल शूद्रों के लिए उत्तम है और किसी के लिए नहीं तथा सफाई कार्य केवल अस्पृश्यों के लिए अच्छी बात है अन्य लोगों के लिए नहीं। यह उनके जीवन का स्व्यंसेवी कार्य बतला कर ऐसा अपमानजनक कार्य उन पर थोपना उन निस्सहाय वर्गों के साथ दुष्टता का तांडव है और इस प्रकार का तांडव श्री गांधी जैसा व्यक्ति ही कर सकता है। इस संबंध में वाल्टेयर के शब्द आज भी याद आते हैं जिन्होंने गांधीवाद के समान प्रचलित वाद का विरोध करते हुए कहा थाः फ्यह कहना भौंडा मजाक है कि कुछ लोगों की पीड़ा से दूसरों को सुख मिलता है और संसार भर का इसमें कल्याण है। एक मरणासन्न व्यक्ति को इससे क्या सुकून मिल सकता है कि उसके रोगग्रस्त शरीर से हजारों कृमियों व कीड़ों का जन्म होता है।य्

चलिए और आलोचनाएं तो हैं ही पर गांधीवाद में यह कारीगरी है कि किसी को सताया जाए और उसी पीडि़त से कहा जाए यह तुम्हारा विशेषाधिकार है। यदि कोई ऐसा वाद है, जो धर्म रूपी अफीम खिलाकर किसी को छूठे विश्वास से अचेतन कर दे, तो वह गांधीवाद है। शेक्सपीयर के कथन को यदि इस संदर्भ में लिया जाए, तो कहना पड़ेगा कि मक्कारी और धोखाधड़ी का नाम है - गांधीवाद।

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ऐसा है गांधीवाद। गांधीवाद को समझ लेने के बाद इस प्रश्न का क्या उत्तर है कि गांधीवाद के अनुसार इस देश का संविधान बन जाए, तो उसमें अस्पृश्यों की क्या स्थिति होगी? इसका उत्तर तलाश करने में अधिक माथापच्ची की जरूरत न होगी। उसकी हिंदुओं के निम्नतम वर्ग से क्या तुलना होगी? काफी प्रकाश डाला जा चुका है कि गांधीवादी व्यवस्था में निम्नतम वर्ग का हिंदू और अस्पृश्य यद्यपि दोनों ही पैतृक संपत्ति से वंचित वर्ग के होते हुए भी उनकी स्थिति बेहतर नहीं हो सकती, बल्कि अस्पृश्यों की स्थिति बदतर ही रहेगी, क्योंकि भारतवर्ष में सवर्ण हिंदुओं के निम्नस्तर का मनुष्य भी अर्थात् जंगली असभ्य और पहाड़ी कबीले का व्यक्ति भी, चाहे शैक्षिक और आर्थिक दृष्टि से अस्पृश्यों से बहुत बेहतर भी न हो, तो भी वह अस्पृश्यों के मुकाबले अधिक सम्मान का पात्र समझा जाता है। यह बात नहीं है कि वह स्वयं को अस्पृश्यों से श्रेष्ठ समझता है, परंतु हिंदू समाज उनको अस्पृश्यों से श्रेष्ठ मानता है। प्राप्त करने वालों की कतार में उसका स्थान सबसे पीछे और पिटने वालों में सबसे आगे होता है।

  1. भारत के कुछ प्रांतों ने ऐसे कानून बनाए हैं जिनके अनुसार सफाई कार्य करने से इंकार करना जुर्म

करार दिया गया है और वैसा जुर्म करने वाले अपराधी को फौजदारी मुकदमा चलाकर दंडित किया जा

सकता है।