11. गांधीवाद - Page 319

304 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

लगाए गए प्रतिबंध को हटाने के लिए तैयार हैं और वे कानून के क्षेत्र में, डॉक्टरी के क्षेत्र में, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में और अन्य क्षेत्रों में शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। चलिए जो है, सो ठीक है। परंतु क्या अस्पृश्य ज्ञान से कुछ लाभ उठा सकते हैं? क्या उन्हें अपना व्यवसाय चुनने की स्वतंत्रता होगी? क्या डिग्रियां लेकर भी वे डॉक्टर, इंजीनियर और वकालत का व्यवसाय कर सकेंगे? इन प्रश्नों का उत्तर गांधीवाद में स्पष्ट रूप से नकारात्मक है। ख्1, गांधीवाद के अनुसार अस्पृश्यों को निश्चित तौर पर अपना पैतृक व्यवसाय ही अपनाना होगा। इस बात का कोई जवाब नहीं है कि वे व्यवसाय तो गंदे हैं। जिस समय उन गंदे व्यवसायों को पैतृक घोषित किया गया था, तो वह बलपूर्वक कराया गया था। उसमें पसंद न पसंद का कोई सवाल न था। गांधीवाद का तर्क है कि जो एक बार निश्चित कर दिया गया वह अटल है चाहे वह गलत ही क्यों न हो। गांधीवाद के अनुसार अस्पृश्यता आद्योपांत भंगी हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि अस्पृश्य इससे तो अस्पृश्यता की रूढि़गत व्यवस्था को पसंद करेंगे। हिंदू शास्त्रों ने अस्पृश्यों पर अज्ञानता को आवश्यक रूप से लाद दिया था। हिंदू शास्त्रों में भंगी का काम करना उन अस्पृश्यों के लिए सह्य था। परन्तु गांधीवाद तो शिक्षित अस्पृश्य को भी भंगी का काम करने के लिए विवश करता है। यह बेहरमी के सिवा कुछ नहीं है। गांधीवाद की कुटिल अनुकंपा अभिशाप से बढ़कर है। गांधीवाद का अस्पृश्यता निवारण झांसा है। गांधीवाद में कोई सार नहीं है।

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गांधीवाद में और क्या है जिसे अस्पृश्य अपने परम लक्ष्य की प्राप्ति के लिए स्वीकार कर सकें। अस्पृश्यता निवारण अभियान के झांसे के सिवाए यह सीधे तौर पर सनातन धर्म का दूसरा नाम है, जो कट्टठ्ठर रूढि़वादी हिंदू धर्म का ही पुराना नाम है। गांधीवाद में कौन सी बातें हैं, जो रूढि़वादी हिंदू धर्म में न पाई जाती हों। हिंदू धर्म में जातियां हैं, गांधीवाद में भी जातियां हैं। हिंदू धर्म पैतृक व्यवसाय ग्रहण करने के कानून में विश्वास करता है और गांधीवाद भी। हिंदू धर्म गौपूजा का आदेश देता है और गांधीवाद भी। हिंदू धर्म, कर्म, फल को और जन्म के पूर्व की मनुष्य का भाग्य निर्धारित हो जाना मानता है, गांधीवाद भी। हिंदू धर्म शास्त्रों को प्रमाण मानता है और गांधीवाद भी। हिंदू धर्म अवतारवाद में विश्वास करता है और गांधीवाद भी। हिंदू धर्म मूर्ति पूजा में विश्वास करता है और गांधीवाद भी। गांधीवाद ने जो कुछ किया वह अब हिंदू धर्म का शास्त्रीय और सैद्धांतिक औचित्य सिद्ध करने के लिए किया। हिंदू

  1. इस विषय पर गांधी जी कि विचारों के लिए देखिए अध्याय 11

  2. देखें यंग इंडिया, 6 अक्तूबर, 1921