अनोखी घटना
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छठे प्रस्ताव द्वारा अस्पृश्यों और डिप्रेस्ड क्लासेस के अलावा सभी हिंदुओं
से विशेषकर उन उच्च सवर्ण हिंदुओं से, जो राजनीतिक अधिकारों का दावा
करते हैं, अनुरोध किया जाता है कि वे डिप्रेस्ड क्लासेस पर से पतित होने के
कलंक को मिटाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं क्योंकि उन बुराइयों ने उन्हें
गुलाम बना रखा है और उनकी दशा अपने ही देश में अत्यंत खराब है।य्
पहली सभा से लगभग एक सप्ताह पश्चात् नवंबर 1917 में ही दूसरी सभा हुई थी। उस सभा के अध्यक्ष श्री बापू जी नामदेव बागड़े थे जो एक गैर-ब्राह्मण पार्टी के नेता थे। उस सभा में निम्नलिखित प्रस्ताव ख्1, सर्वसम्मति से पारित हुए µ
कि ब्रिटिश शासन के प्रति वफादारी का प्रस्ताव।
11 नवंबर, 1917 को आयोजित बैठक में इस प्रस्ताव के बहुमत से
परियोजना घोषित किए जाने के बावजूद यह सभा कांग्रेस-लीग योजना को
समर्थन नहीं देगी।
- कि इस सभा की मंशा यह है कि भारत के प्रशासन पर ब्रिटिश शासन
का तब तक नियंत्रण रहे जब तक कि सभी वर्ग, विशेषतया डिप्रेस्ड क्लासेस
देश के प्रशासन में प्रभावी रूप से भागीदार होने की स्थिति में नहीं आते।
- कि यदि ब्रिटिश सरकार ने भारतीय जनता को राजनैतिक सुविधाएं देने
का निर्णय किया है तो यह सभा अनुरोध करती है कि सरकार को विभिन्न
विधान सभाओं अथवा विधायिकाओं में अस्पृश्यों को अपने प्रतिनिधि भेजने
के अधिकार देने चाहिए ताकि उनके नागरिक एवं राजनैतिक अधिकार
सुनिश्चित किया जा सकें।
- कि यह सभा बहिष्कृत भारत समाज (डिप्रेस्ड इंडिया एसोसिएशन) के
उद्देश्यों को स्वीकृति प्रदान करती है और उसे अपनी ओर से भी श्री मान्टेग्यू
के सम्मुख अपने प्रतिनिधि भेजने का समर्थन करती है।
- कि यह सभा सरकार से अनुरोध करती है कि वह डिप्रेस्ड क्लासेस की
विशेष आवश्यकताओं पर ध्यान देते हुए इनके लिए निःशुल्क तथा अनिवार्य
प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था करे और डिप्रेस्ड क्लासेस के विद्यार्थियों को
छात्रवृत्ति के रूप में विशेष सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- कि यह सभा उपरोक्त सभी प्रस्ताव वायसराय तथा बम्बई सरकार के
समक्ष भेजने के लिए अपने अध्यक्ष को प्राधिकृत करती है।
- वही पृ. 75