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परिशिष्ट 1
अस्पृश्यों के लिए बारदोली कार्यक्रम पर स्वामी श्रद्धानंद के
विचार
अस्पृश्यों के उत्थान की योजना बनाने के लिए 1922 में कांग्रेस उप-समिति के संबंध में स्वामी श्रद्धानंद तथा कांगे्रस के महामंत्री पंडित मोतीलाल नेहरू के मध्य पत्र व्यवहार -
1. स्वामी जी का पत्र
महामंत्री
अखिल भारतीय कांगे्रस कमेटी
शिविर, दिल्ली।
मैं सधन्यवाद आपके पत्र संख्या 331 और 332 की पावती भेज रहा हूँ जिसमें अस्पृश्यता के विषय में कार्यसमिति और अखिल भारतीय कांगे्रस कमेटी के संकल्पों का मसौदा दिया हुआ है। मुझे यह जानकर दुख हुआ कि अखिल भारतीय कांगे्रस कमेटी के संकल्प में, जिस रूप में वह है, समिति द्वारा पारित सभी बातें सम्मिलित नहीं की गई हैं।
तथ्य ये हैं - मैंने श्री विट्ठल भाई पटेल (तत्कालीन महामंत्री) को दिनांक 23 मई, 1992 को निम्नलिखित पत्र भेजा था, जो देश के प्रमुख समाचारपत्रों में भी छपा थाः-
फ्प्रिय श्री पटेल,
एक समय ऐसा था, (यंग इंडिया, दिनांक 25 मई, 1921 देखें) जब महात्मा जी ने अस्पृश्यता के प्रश्न को कांगे्रस कार्यक्रम में प्रमुख स्थान दिया था। अब मुझे मालूम हो रहा है कि दलित वर्गों के उत्थान का प्रश्न रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया है। जबकि खादी की ओर हमारे कार्यकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया गया है और उसके लिए यथोचित धनराशि भी निश्चित की गई है, राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के प्रबंध के लिए एक उप-समिति गठित की गई है और उसके लिए धन एकत्र करने के लिए विशेष अपील की गई है। अस्पृश्यता निवारण के प्रश्न को अहमदाबाद, अहमदनगर और मद्रास को थोड़ा सा धन देकर ताक पर रख दिया गया है। मेरा विचार है कि नौकरशाही द्वारा हमारे ही भाइयों में से छह करोड़ को हमारे विरुद्ध कर देने से खादी कार्यक्रम भी पूर्णतया सफल नहीं हो सकता। कार्यसमिति के सदस्य शायद यह नहीं जानते कि हमारे दबे कुचले भाई खादी को छोड़कर सस्ते विदेशी