अस्पृश्यों के लिए बारदोली कार्यक्रम पर स्वामी श्रद्धानंद के विचार - Page 327

312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

निर्णय की सूचना कृपया मेरे कार्यालय इलाहाबाद को तार द्वारा भेजें। यह कहने की आवश्यकता नहीं कि आपकी उप-समिति जो संकल्प लाएगी, कार्य समिति उस पर विचार करेगी।

अलग कुओं और स्कूलों के संबंध में कार्य समिति के संकल्प में परिवर्तन के लिए आपकी उप-समिति, जो सुझाव देगी कार्य समिति उस पर विचार करेगी।

इलाहाबाद के फ्दि इंडिपेंडेंटय् और दिल्ली के फ्कांगे्रसय् समाचारपत्रों के अनुदान के संबंध में आपको भ्रम है। फ्दि इंडिपेंडेंटय् के संबंध में संयुक्त प्रांत प्रदेश कांगे्रस की प्रार्थना पर 25,000 रुपये का ऋण दिया गया था और फ्दि कांगे्रसय् के लिए ऋण पूर्णतया अस्वीकार कर दिया गया था।

बम्बई, जुलाई, 23, 1922 आपका विश्वासपात्र

मोतीलाल नेहरू

महामंत्री

(3) स्वामी जी का प्रत्युत्तर

प्रिय पंडित मोतीलाल जी,

आपका 23 जुलाई, 1922 का बम्बई से भेजा हुआ पत्र जो अस्पृश्यता उप-समिति से मेरे त्यागपत्र के संबंध में है मुझे प्राप्त हुआ। अफसोस कि मैं त्यागपत्र पर पुनः विचार करने के लिए तैयार नहीं हूं, क्योंकि मैंने अपने प्रथम पत्र में जिन तथ्यों का उल्लेख किया है उनकी उपेक्षा की गई है। (1) कृपया श्री राजगोपालचारी से जांच कर मालूम करें कि अखिल भारतीय कांगे्रस कमेटी के पास जमा धनराशि में से मैंने कम से कम एक लाख रुपये देने का प्रस्ताव रखा था, जिसमें उन्होंने कोई संशोधन पेश नहीं किया। अभिप्राय यही था कि उप-समिति द्वारा वांछित धनराशि कार्य समिति स्वीकार कर लेगी और समिति का भी यही विचार था कि अस्पृश्यता मद पर जितना भी संभव हो उतना धन दिया जाए। अध्यक्ष ने मुझे अलग बुला कर समिति की आर्थिक स्थिति स्पष्ट की। यदि यह सही है, तो संशोधन का प्रस्ताव क्यों नहीं लाया गया?

(2) क्या आपने श्री विट्ठल भाई जे. पटेल से पूछा कि क्या अखिल भारतीय कांगे्रस कमेटी के सदस्यों ने मुझे उप-समिति का संयोजक नियत करने का प्रस्ताव नहीं रखा था और उन्होंने कहा था कि स्वामी ही का नाम पहले आया है, इसलिए उन्हें ही संयोजक चुना जाता है। नया प्रस्ताव लाने की कोई आवश्यकता नहीं? इसके