314 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
परिशिष्ट 2
दलित वर्गों के लिए राजनीतिक संरक्षण प्रदान करना
दलित वर्गों के विशेष प्रतिनिधित्व के लिए दावों के संबंध में अनुपूरक ज्ञापन जो गोलमेज सम्मेलन में डा. बी.आर. अम्बेडकर तथा राव बहादुर आर. श्रीनिवासन द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
पिछले वर्ष स्वशासी भारत के लिए बनने वाले संविधान में दलित वर्गों के राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु हमारे द्वारा ज्ञापन प्रस्तुत किया गया था, जो अल्पसंख्यक समिति के कार्यवृत्त में मुद्रित खंड में तीसरे परिशिष्ट में दिया हुआ है। उसमें हमने मांग की थी कि दलित वर्ग के विशेष प्रतिनिधित्व को, जिसे हम उन वर्गों के लिए आवश्यक मानते हैं, विस्तृत रूप से परिभाषित नहीं किया था। कारण यह था कि प्रश्न के पहुंचने से पहले अल्पसंख्यक उप-समिति की कार्यवाही समाप्त हो चुकी थी। हमारा प्रस्ताव है कि अब हम उस छूटे हुए प्रश्न को अनुपूरक ज्ञापन के रूप में तैयार कर इस वर्ष की अल्पसंख्यक उप-समिति की बैठक में उनके सामने प्रस्तुत करें।
1. विशेष प्रतिनिधित्व की सीमा
(अ) प्रांतीय विधानमंडलों में विशेष प्रतिनिधित्व
(1) बंगाल, मध्य प्रांत, असम, बिहार, उड़ीसा, पंजाब और संयुक्त प्रांत में दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व साइमन कमीशन और इंडियन सेंट्रल कमेटी द्वारा अनुमानित जनसंख्या के अनुपात में होगा।
(2) मद्रास में दलित वर्ग के लिए 22 प्रतिशत प्रतिनिधित्व होगा।
(3) बम्बई मेंःµ
(अ) यदि सिंध बम्बई प्रेसीडेंसी का भाग बना रहता है, तो दलित वर्गों
का प्रतिनिधित्व 16 प्रतिशत होगा।
(ब) बम्बई पे्रसीडेंसी से सिंध को अलग हो जाने पर सिंध में दलित
वर्गों का प्रतिनिधित्व मुसलमानों के प्रतिनिधित्व के बराबर होगा,
क्योंकि दोनों की जनसंख्या समान है।
(ब) संघीय विधानमंडल में विशेष प्रतिनिधित्व
संघीय विधानमंडल के दोनों सदनों में भारत की संपूर्ण जनसंख्या के अनुपात में दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व होगा।