परिशिष्ट
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- प्रतिनिधित्व -
हमने निम्नांकित अनुमान के आधार पर विधानमंडलों में विशेष प्रतिनिधित्व का अनुपात निश्चित किया है।ःµ
(1) हमारा अनुमान है कि दलित वर्गों की जनसंख्या के जो आंकड़े साइमन कमीशन (खंड 1, पृ. 40) तथा इंडियन सेंट्रल कमेटी (रिपोर्ट, पृ. 44) द्वारा दिए गए हैं वे सही और सीटों का बंटवारा करने में सभी को स्वीकार्य होंगे।
(2) हमारा अनुमान है संघीय विधानमंडल में संपूर्ण भारत समाहित होगा जिसमें भारतीय रजवाड़ों तथा केंद्र प्रशासित क्षेत्रों, गवर्नरों द्वारा शासित प्रांतों में दलित वर्गों की जनसंख्या संघीय विधानमंडल में उनका प्रतिनिधित्व निर्धारित करने में उपयोगी होगी।
(3) हमारा अनुमान है कि ब्रिटिश भारत के प्रांतों के प्रशासनिक क्षेत्र यथावत रहेंगे।
परंतु यदि जनसंख्या के संबंध में, हमारे अनुमानित आधार को चुनौती दी जाती है, जैसा कि कुछ पार्टियों ने ऐसा करने की धमकी दी है और यदि नई जनगणना में दलित वर्गों की जनसंख्या कम दिखाई जाती है अथवा यदि प्रांतों के प्रशासनिक क्षेत्रों में परिवर्तन किया जाता है, जिसके फलस्वरूप जनसंख्या की स्थिति गड़बड़ाती है, तो दलित वर्गों को अधिकार होगा कि अपने प्रतिनिधित्व के अनुपात को बनाए रखने के लिए उसका पुनरीक्षण करें और उसमें यथोचित हिस्सा मांगे। इसी प्रकार यदि अखिल भारतीय संघ नहीं बनता, तो वे अपने प्रतिनिधित्व के अनुपात को फिर से समायोजित कर संघीय विधानमंडल के लिए उसकी गणना करें।
2 - प्रतिनिधित्व का तरीका
(1) प्रांतीय एवं केंद्रीय विधानमंडलों में दलित वर्गों को अपने प्रतिनिधियों को अपने मतदाताओं की पृथक निर्वाचन पद्धति के माध्यम से चुनने का अधिकार होगा।
संघीय या केंद्रीय विधानमंडलों के उच्च सदन में अपने प्रतिनिधित्व के लिए यदि प्रांतीय विधानमंडलों को अपने प्रतिनिधि अप्रत्यक्ष निर्वाचन से भेजना निश्चित हो जाता है, तो दलित वर्ग के लोग उच्च सदन में अपने प्रतिनिधि भेजने के लिए पृथक निर्वाचन प्रणाली का परित्याग करने के लिए सहमत हो सकते हैं परंतु इस शर्त के साथ कि समानुपातिक व्यवस्था के अनुसार उच्च सदन में उनकी सीटों के हिस्से की गारंटी दी जाए।