324 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सकता। श्री गांधी के सोच से अन्य संप्रदायों के लिए विशेष निर्वाचन की व्यवस्था कर दी जाए, तो शायद राष्ट्र खंडित न होगा।
मुझे पूरा विश्वास है कि बहुतों का यह मत है कि स्वराज संविधान के अंतर्गत बहुसंख्यक दल के अत्याचारों को देखते हुए, यदि किसी वर्ग को अपने राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा की आवश्यकता है तो वह वर्ग है दलित वर्ग। यह एक वर्ग है, जो निस्संदेह अपने अस्तित्व के संघर्ष को जीवित रखने की स्थिति में नहीं है। जिस धर्म से वे बंधे हुए हैं, वह उन्हें सम्मानित स्थान देने के बजाए कुष्ठ रोगी कहता है जो व्यवहार बर्ताव के योग्य नहीं। आर्थिक स्थिति ऐसी है कि दलित वर्ग दो जून की रोटी जुटाने के लिए सवर्ण हिंदुओं पर निर्भर करता है। न केवल उनके जीवन के सभी मार्ग हिंदुओं के पूर्वाग्रह के कारण बंद हैं, बल्कि हिंदू समाज द्वारा सदा प्रयत्न किया जाता है कि सारे दरवाजे बंद कर दिए जाएं, ताकि दलित वर्ग को अवसर न मिल पाए कि वे ढंग से जी सकें। वास्तव में यह कहने में कोई अतिशयोत्तिQ नहीं कि प्रत्येक गांव में सवर्ण हिंदू आपस में विभाजित हैं परन्तु उन दलित वर्गों को जो वहां कम संख्या में हैं और बिखरे हुए हैं निर्दयता से दबाने के लिए सदा षड्यंत्र रचते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में सभी समझदार और निष्पक्ष व्यक्ति यह स्वीकार करेंगे कि ऐसी जाति के लिए संगठित अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष करके सफलता प्राप्त करने के लिए एकमात्र रास्ता है कि उनको राजनीतिक अधिकार देना परम आवश्यक बनाया जाए।
मुझे यह सोचना चाहिए था कि दलित वर्गों के हितचिंतक को एड़ी चोटी का जोर लगा कर उन्हें नए संविधान में अधिक से अधिक राजनीतिक अधिकार दिलाएं। परंतु श्री गांधी के सोचने के ढंग ही निराले हैं जो मेरी समझ से परे हैं। दलित वर्गों को सांप्रदायिक फैसले के अंतर्गत, जो अधूरे राजनीतिक अधिकार दिए गए हैं, वह न केवल उन्हें बढ़ाए जाने का प्रयत्न कर रहे हैं, बल्कि अपनी जान की बाजी लगा कर, जो कुछ अधिकार उन्हें मिले हैं, उनसे भी वंचित करने पर तुले हैं। दलित वर्गों के राजनीतिक अस्तित्व को पूरी तरह तबाह करने का यह श्री गांधी का पहला प्रयत्न नहीं है। बहुत पहले अल्पसंख्यक समझौता हुआ था। श्री गांधी ने मुसलमानों और कांगे्रस के मध्य समझौता कराने का प्रयत्न किया। मुसलमानों ने जो चौदह मांगें प्रस्तुत की थीं, उनको श्री गांधी ने इस बात पर समर्थन देने की पेशकश की थी कि उनके बदले में दलित वर्गों के लिए उन्होंने सामाजिक प्रतिनिधित्व के जो दावे रखे हैं, उनका विरोध करने के लिए मुसलमान श्री गांधी का साथ दें।