श्री गांधी के आमरण अनशन पर बी.आर. अम्बेडकर द्वारा जारी किया गया बयान - Page 343

328 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मुझे हिंदू सुधारकों तथा उनके द्वारा किए जाने वाले सुधारों के बारे में महाद और नासिक के आंदोलनों से काफी अनुभव हुआ है, जिनसे मैं कह सकता हूं कि दलित वर्गों का कोई ऐसा हितचिंतक नहीं है, जो उन्हें उनके ऊपर किए जाने वाले बर्बर अत्याचारों से छुटकारा दिला कर उन्नति के पथ पर अग्रसर कर सके। ऐसे समाज-सुधारक जो मुसीबत के क्षणों में अपने भाई-बंधुओं की भावना को ठेस पहुंचाने की अपेक्षा समाज सुधार के अपने सिद्धांतों को ही तिलांजलि दे देते हैं, दलित वर्गों के लिए बेकार हैं।

इसलिए मैं अपने लोगों की सुरक्षा के लिए वैधानिक गारंटी चाहता हूं। यदि श्री गांधी सांप्रदायिक पंचाट में परिवर्तन कराना चाहते हैं, तो उन्हें चाहिए कि वह अपने ऐसे प्रस्ताव सामने लाएं और सिद्ध करें कि उनके प्रस्ताव सांप्रदायिक पंचाट द्वारा दी गई गारंटी की अपेक्षा बेहतर गारंटी देते हैं।

मुझे आशा है कि श्री गांधी ने जो अतिवादी कदम उठाने की ठानी है, वह उसका विचार छोड़ देंगे। जब हम पृथक निर्वाचन की मांग करते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं कि हम हिंदू समाज को हानि पहुंचाना चाहते हैं। यदि हम पृथक निर्वाचन की मांग कर रहे हैं, तो हम ऐसा इसलिए करना चाहते हैं कि हमारी असहाय जनता सवर्ण हिंदुओं की दया पर ही निर्भर रहने के लिए न छोड़ दी जाए। श्री गांधी की तरह हमें भी गलती करने का अधिकार है और हमें आशा है कि वह हमें अपने उस अधिकार से वंचित नहीं करेंगे। उनका आमरण अनशन का इरादा किसी और अच्छे कार्य के लिए हो, तो बड़ी अच्छी बात होगी। आमरण अनशन जैसे अतिवादी कार्य यदि वह हिंदू-मुसलमान दंगों के विरोध में करते अथवा अन्य किसी राष्ट्र हित में करते, तो उसका कुछ अर्थ समझ में आता। श्री गांधी का यह अनशन निश्चित रूप से दलित वर्गों की दशा में कोई सुधार नही ला सकता। श्री गांधी चाहे यह जानते हों अथवा नहीं, उनके इस अनशन का परिणाम होगा, सारे देश में उनके अनुयायियों द्वारा दलित वर्गों के प्रति आतंकवाद।

इस तरह का दबाव दलित वर्गों को हिंदू समाज से नहीं जोड़ सकता, अलग होने से नहीं रोक सकता, यदि वे उस समाज से बाहर जाने का संकल्प कर लें। यदि श्री गांधी दलित वर्गों से हिंदू-धर्म तथा राजनीतिक अधिकार प्राप्त करने - दो में से किसी एक का चुनाव करने के लिए कहें, तो मेरा पूरा विश्वास है कि श्री गांधी को अनशन से बचाने हेतु दलित वर्ग के लोग राजनीतिक अधिकार प्राप्त करना ही पसंद करेंगे। यदि श्री गांधी अपने इस कदम के परिणामों के विषय में ठंडे दिमाग से विचार करें, तो मुझे संदेह है कि उन्हें उल्लेखनीय विजय प्राप्त होगी। यह अब भी ध्यान देने