परिशिष्ट
329
योग्य महत्वपूर्ण बात है कि ऐसे प्रतिक्रियावादी और अनियंत्रित शत्तिQयों को श्री गांधी छूट देकर हिंदू जाति और दलित वर्गों के मध्य नफरत की भावना को और उत्तेजित करेंगे और दोनों वर्गों के बीच की खाई को और चौड़ा करेंगे। गोलमेज सम्मेलन में जब मैंने श्री गांधी का विरोध किया था, तब देश में मेरे विरुद्ध काफी हुल्लड़ मचा था और अपने को राष्ट्रीय समाचार पत्र कहने वाले अखबारों ने मुझे राष्ट्रीय हित में अड़ंगा डालने वाला देशद्रोही करार देने का षडयंत्र रचा था और मेरी पार्टी के विरुद्ध होने वाली सभाओं के समाचारों को बढ़ा-चढ़ा कर छापते थे, हालांकि कुछ सभाएं होती ही नहीं थी। दलित वर्गों में पारस्परिक विभेद करने के लिए रिश्वत का खुल कर लालच दिया गया। कुछ हिंसक वारदातें भी की गइंर्।
यदि श्री गांधी उपरोक्त सभी प्रकार की बातों की बड़े पैमाने पर पुनरावृत्ति नहीं चाहते, तो भगवान के लिए अपने निर्णय पर फिर से विचार करें और विनाशकारी परिणामों से बचाएं। मुझे विश्वास है कि श्री गांधी ऐसा नहीं चाहते हैं। परंतु यदि वह अपना आमरण अनशन नहीं छोड़ते, तो उनके न चाहते हुए भी इसके दुष्परिणाम उसी प्रकार निश्चित हैं, जिस प्रकार दिन के बाद रात का आना निश्चित होता है।
यह बयान समाप्त करने से पहले मैं जनता को विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि यद्यपि मैं समझता हूं कि बात अब समाप्त हो चुकी है, परंतु तब भी मैं श्री गांधी द्वारा लाए गए प्रस्तावों पर विचार करने के लिए तैयार हूं। मैं समझता हूं कि श्री गांधी मुझे इस बात के लिए बाध्य नहीं करेंगे कि मैं उनके जीवन तथा अपने निस्सहाय लोगों के अधिकारों में से किसी एक को चुनूं, क्योंकि भविष्य में अपने लोगों की आने वाली पीढि़यों को हथकड़ी और बेड़ी में जकड़ कर पड़े रहने के लिए मैं कभी नहीं कहूंगा।
-बी.आर. अम्बेडकर