ट्रावनकोर में मंदिर प्रवेश - Page 346

परिशिष्ट

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इस संबंध में दबाव इसका जवाब नहीं है तथा राजनीतिक के बजाय सीधी कार्यवाहियों से यह समस्या और अधिक घातक हो सकती है। दुर्भाग्य से मैं श्री गांधी के इस विचार से सहमत नहीं हूँ कि मुद्दे को अंतर्जातीय सहभोज से अलग रखा जाए। इस संबंध में मैं डॉ. अम्बेडकर के इन विचारों से सहमत हूं कि दलित वर्गों का तत्काल सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान हमारा कार्यक्रम होना चाहिए।य्

इस बयान से स्पष्ट है कि 1933 में श्री सी.पी. रामास्वामी अय्यर को आध्यात्मिक विचारों ने प्रभावित नहीं किया था। 1933 के बाद आध्यात्मिक विचार जमने लगे। श्री अय्यर के विचार 1936 में कैसे बदल गए? ट्रावनकोर में 1936 में ऐसी क्या बात हुई, जिससे श्री अय्यर को विचार बदलने के लिए विवश होना पड़ा? यह स्मरणीय है कि 1936 में ट्रावनकोर में इजवा जाति का एक सम्मेलन हुआ। इजवा मालाबार में अस्पृश्य जाति से संबंधित हैं और मालाबार में और भी क्षेत्रों में फैले हुए हैं। वह पढ़ा-लिखा समाज है और इसकी आर्थिक स्थिति मजबूत है। यह जागृत जाति भी है, जो राज्य में सामाजिक एवं धार्मिक बुराइयों के विरोध में आंदोलन किया करती है। सम्मेलन इस बात पर विचार करने के लिए बुलाया गया था कि इजवा लोग हिंदू धर्म को कोई अन्य धर्म अपनाने हेतु त्याग दें अथवा नहीं। ख्1, इजवा लोग बहुत बड़ी संख्या में हैं। इतनी बड़ी जाति का हिंदू धर्म से नाता तोड़ना हिंदुओं की कब्र खोदने के समान था और उस सभा ने खतरे को साकार रूप दे दिया।

यह कहना गलत न होगा कि यह घोषणा खतरे को टालने के लिए की गई थी। यदि वह सही है, तो घोषणा के पीछे आध्यात्मिक तत्व नहीं था। यह नहीं भूलना चाहिए कि सर सी.पी. रामास्वामी अय्यर का भौतिक कार्य को आध्यात्मिक रंग देने का अपना ढंग है। हिंदू विधान के अनुसार ब्राह्मण उस प्राणदंड से मुक्त हैं, जो सभी गैर-ब्राह्मणों पर लागू होता है। यह भेदभाव का ज्वलंत उदाहरण है। सर सी.पी. रामास्वामी अय्यर ने अभी हाल ही में ट्रावनकोर राज्य में प्राणदंड को समाप्त करने की घोषणा करके बहुत बड़े मानवीय सुधार करने का श्रेय प्राप्त किया। वास्तव में इस घोषणा का उद्देश्य था, कानून के सामने समानता के सिद्धांत के आदेश को मान कर ब्राह्मणों को उस शिरोच्छेदन से मुक्ति दिलाना।

इस घोषणा से वास्तव में क्या परिवर्तन हुए और कहां तक यह सुप्तावस्था में रही? ट्रावनकोर के तथ्यों को समझना संभव नहीं है। मद्रास विधान सभा में मालाबार

  1. यह सभा 1935 में येवला में मेरी अध्यक्षता में हुई सभा में लिए गए फैसले पर विचार करने के लिए

की गई थी।