अस्पृश्यों के पृथक अस्तित्व को मान्यता - Page 351

336 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

परिशिष्ट - 6

अस्पृश्यों के पृथक अस्तित्व को मान्यता

भारतीय संविधान में अस्पृश्यों की क्या स्थिति होगी इस विषय पर ब्रिटिश सरकार की घोषणा।

प्रस्तावना

तत्कालीन वायसरायों एवं भारत मंत्रियों की घोषणाओं का उल्लेख करने की आवश्यकता इसलिए पड़ी कि हाल ही में श्री गांधी को लार्ड वेवल ने उनके 15 अगस्त, 1944 के पत्र के उत्तर में जवाब दिया कि भारत के राष्ट्रीय जीवन में अनुसूचित जातियां पृथक अस्तित्व रखती हैं और भारतीयों को सत्ता सौंपने के पहले भावी संविधान में उनकी भी सहमति नितांत आवश्यक है। उसकी समाचार-पत्रों द्वारा काफी आलोचना हुई है। यह आलोचना इस सोच पर आधारित है कि किसी संकल्प में अनुसूचित जातियों के लोगों का पृथक अस्तित्व होने को मान्यता नहीं थी और उनकी सलाह आवश्यक नहीं बतलाई गई थी। ऐसा विश्वास अल्पसंख्यकों के संबंध में कुछ नहीं कहता और यह तर्क दिया जाता है कि अनुसूचित जातियां न तो कोई प्रजाति है और न धार्मिक अल्पसंख्यक हैं।

यह कहने की आवश्यकता नहीं कि ऐसी आलोचना के पीछे कितनी अनभिज्ञता है। हिंदू धर्म ने अस्पृश्यता के मत को आधार मान कर हिंदुओं की प्रमुख संस्था से अनुसूचित जातियों को इस चालाकी से अलग कर दिया कि वे हिंदुओं से इतना पृथक हो गए कि हिंदू और मुसलमान अथवा हिंदू और सिख अथवा हिंदू और ईसाई पृथक समझे जाते हैं। यह मानना कठिन है कि अस्पृश्यता, पृथकता और संगरोध से बढ़कर और किस सिद्धि का प्रतिफल है और ऐसी आलोचना करने वाला वही दुर्भावना वाला वर्ग है जो अनुसूचित जातियों को उनके राजनीतिक अधिकारों के दावों को नकारने के उद्देश्य से शब्दजाल फैला रहा है। जो लार्ड वेवल की घोषणाओं को प्रकारांतर कह रहे हैं, वे पूरी तरह भूल गए हैं कि जब से सत्ता हस्तांतरण का विचार ब्रिटिश सरकार के मन में आया है, तभी से अनुसूचित जातियों की बात भी उसके विचाराधीन है। 1917 से जब मांटेग्यू चेम्सफोर्ड रिपोर्ट में उत्तरदायी सरकार की वकालत की गई थी, ब्रिटिश सरकार ने एक निश्चित रूख स्पष्ट कर दिया था कि जब तक अनुसूचित जातियों का संरक्षण समुचित संवैधानिक व्यवस्था द्वारा नहीं कर दिया जाता किसी भी स्थिति में भारतीयों को सत्ता हस्तांतरित नहीं की जा सकती। वर्ष 1917 से 1941 तक समय-समय पर वायसरायों तथा भारतीय सचिवों के द्वारा की गई घोषणाओं में से कुछ घोषणाएं अगले पृष्ठों पर उद्धत की गई हैं। इससे