अस्पृश्यों के पृथक अस्तित्व को मान्यता - Page 354

परिशिष्ट

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देने का प्रस्ताव किया गया था। यह सच है कि सभी काउंसिलों में सीटों के तौर पर ऐसे कर्मचारियों का अनुपात एक और 6 का है, जिन्हें दलित जातियों का ध्यान हो सकता है, परंतु हमारे विचार से रिपोर्ट का लक्ष्य जिस सुधार की ओर संकेत करता है, उसके लिए उचित व्यवस्था नहीं की गई है। लेखकों ने बतलाया है कि दलित जातियों को आत्म-संरक्षण की शिक्षा अवश्य दी जानी चाहिए। ऐसी आशा केवल दिवास्वप्न है कि जिस असेम्बली में साठ या सत्तर हिंदू हों वहां किसी एक जाति का अकेला चना भाड़ फोड़ पाएगा। अतः उस समिति रिपोर्ट के पैरा 151, 152, 154 और 155 में प्रतिपादित सिद्धान्तों की अपेक्षाओं की पूर्ति हेतु हमें बहिष्कृत लोगों के प्रति अधिक उदारता बरतनी होगी। हम सोचते हैं कि प्रत्येक काउंसिल में दलित वर्गों के प्रतिनिधि पर्याप्त संख्या में हों, और वे नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर न रह जाएं और कोई प्रतिनिधि सुर में सुर मिला कर बोलने का उत्साह न जुटा पाएं। मद्रास के मामले में हमारी सलाह है कि उन्हें 6 सीटें दी जाएं। बंगाल, यू.पी. और बिहार तथा उड़ीसा में चार-चार सीटें दें। मध्य प्रांत और बंबई में दो-दो और अन्य प्रांतों में एक-एक। इस प्रकार हम समझते हैं कि समिति की रिपोर्ट में संशोधन की स्पष्ट आवश्यकता है।

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सांविधिक उपयोग की नियुक्ति पर 30 मार्च, 1927 को हाउस ऑफ लार्ड में भारत-सचिव लार्ड बुर्कनहैड के भाषण से अंश

मुझे दलित वर्ग के मामले पर गौर करना है। भारत में दलित वर्ग एक बड़ा समुदाय है। संख्या की दृष्टि से भी 6 करोड़ दलित हैं। उनकी दुर्दशा जितनी भयावह है, उतनी ही हृदयविदारक भी है, और अतीत में भी ऐसी ही थी। उन्हें सामाजिक व्यवहार से दूर रखा गया है। इस वर्ग के व्यक्ति की यदि उच्च वर्ग के व्यक्ति पर परछाई भी पड़ जाती है, तो उच्च वर्ण के लिए सूर्य का प्रकाश भी अपवित्र हो जाता है। वे सार्वजनिक स्थान से पानी नहीं पी सकते। अपनी प्यास बुझाने के लिए उन्हें मीलों भटकना पड़ता है और उन्हें सैकड़ों पीढि़यों से अस्पृश्य के नाम से पुकारा जाता है। भारत में वे 6 करोड़ हैं, तो क्या इस आयोग में दलित वर्ग का प्रतिनिधि नहीं होना चाहिए। मेरे विचार से लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति, यहां तक कि विरोधी पक्ष के हमारे मित्र भी, दलित वर्ग के प्रतिनिधि से रहित आयोग बनाने का सुझाव नहीं देंगे और मैं तो कभी भी ऐसा आयोग बनाने को तैयार नहीं, जिसमें इस वर्ग का प्रतिनिधि न हो। सचमुच आप ऐसी संयुक्त जूरी बनावें जैसा मैंने कहा।