अस्पृश्यों के पृथक अस्तित्व को मान्यता - Page 356

परिशिष्ट

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करे और उस प्रतिनिधित्व का अनुपात निर्धारित करे। कमीशन में सुझाव है कि प्रांतों के चुनाव क्षेत्र की समस्त जनसंख्या में दलितवर्ग की जनसंख्या के अनुपात का तीन चौथाई संरक्षण देना अनुचित रूप से अधिक हो सकता है। संयुक्त प्रांत की सरकार ने हिसाब लगाया है कि इस प्रांत में कमीशन के प्रस्ताव के अनुसार प्रांतीय विधानमंडल के लिए इस समुदाय के एकमात्र नामजद सदस्य के स्थान पर कम से कम चालीस सदस्य आएंगे। दलित वर्ग के प्रतिनिधित्व की पूरी समस्या पर मताधिकार समिति को सावधानी से विचार करना है और इस स्तर पर हम केवल यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हमारे विचार से उन वर्गों के लिए सर्वोत्तम ढंग से उचित प्रतिनिधित्व सुरक्षित किया जाना चाहिए। यद्यपि उसी समुदाय में विचारों में मतभेद है परंतु तब भी हाल ही में दलित वर्गों के संगठनों की जो संभाएं हुई हैं उनमें पृथक निर्वाचन में ही विश्वास व्यक्त किया गया है।

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लोथियन (मताधिकार) समिति, 1932 के निर्देश-पदों से अंश

3 - आपको मालूम है कि वर्तमान निर्वाचन पद्धति में प्रांतीय काउंसिल में पहुंचने वाले सदस्यों को चुनने के लिए भारतीय प्रांतों की जनसंख्या के तीन प्रतिशत से कम लोगों को मताधिकार प्राप्त है और यह स्पष्ट है कि इस समिति की मताधिकार व्यवस्था में अधिकांश जनता तथा समुदाय के महत्वपूर्ण वर्ग विधानमंडलों में अपने प्रतिनिधि भेजने से वंचित र और बिना किसी बाह्य हस्तक्षेप तथा बिना किसी का सहारा लिए स्वतंत्र रूप से यहह जाते हैं। उत्तरदायी संघीय सरकार का सिद्धांत कुछ आरक्षण और सुरक्षाओं के साथ ब्रिटिश सरकार द्वारा स्वीकार कर लिए जाने पर यह तय किया गया है कि गवर्नर शासित प्रांत उत्तरदायी शासित यूनिट बना दिए जाएं, जो अधिकतम संभव स्वतंत्रता का उपभोग कर सकें आवश्यक है कि चुनाव को इतना विस्तृत किया जाए कि जिन विधानमंडलों को यह उत्तरदायित्व निभाना है, उनमें जनसाधारण द्वारा अपनी आवश्यकताओं तथा विचारों को प्रकट करने से वे वंचित न रह जाएं।

सभा की बैठकों में विभिन्न मुद्दों पर हुई बहस से स्पष्ट है कि नए संविधान में दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व के लिए समुचित प्रबंध किए जाएं तथा प्रतिनिधित्व के लिए नामजदगी की व्यवस्था को बेहतर नहीं समझा गया है। जैसा कि आपको मालूम है, इस विचार पर मतभेद है कि क्या दलित वर्ग के लिए पृथक निर्वाचन प्रणाली अपनाई जाए और आपकी कमेटी की जांच-पड़ताल इस प्रश्न के निर्णय में क्या योगदान करे। मताधिकार द्वारा जिसकी आप सिफारिश करे सामान्य मतदान से अस्पृश्य कहां तक