अल्पसंख्यक एवं प्रतिनिधित्व - Page 360

परिशिष्ट

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परिशिष्ट 7

अल्पसंख्यक एवं प्रतिनिधित्व

प्रतिनिधित्व के न्यायविरुद्ध पर मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट और साइमन

कमीशन के विचार

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मांटेग्यू चेम्सफोर्ड रिपोर्ट

भारतीय संवैधानिक सुधारों पर मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट से अंश

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अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व

163 - यह प्रस्तावित किया जाता है कि महत्वपूर्ण अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व चुनाव द्वारा निश्चित किया जाना चाहिए। इसका संकेत उस चुनाव व्यवस्था से है, जो मुसलमानों से संबंधित है, जिन्हें आम चुनावों में इसी प्रकार मतदान करने की अनुमति नहीं दी गई है जैसा कि उनके अपने चुनावों में। इस प्रकार की सुविधा कुछ अन्य समुदायों को न मिल पाने का उल्लेख किया है। जैसा कि पंजाब में सिक्खों को यह सुविधाएं नहीं दी गई हैं, जो मुसलमानों को मिली है। योजना बनाने वाले लोग भी इससे सहमत थे और उन्होंने विभिन्न प्रांतों में विशेष मुस्लिम चुनाव क्षेत्र आरक्षित करने के लिए सीटों के अनुपात का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया था। हमें यह ज्ञात नहीं हो सका कि समझौता वार्ता के बिना किस आधार पर सीटों की संख्या ज्ञात की गई। सभी प्रांतों में यहां तक कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी पृथक निर्वाचन सिद्धांत का प्रस्ताव किया गया है और जहां भी उनकी संख्या कम है, उनकी संख्या से अधिक मौजूदा प्रतिनिधित्व के अनुपात से बढ़कर सीटें देने की सलाह दी गई है। साथ ही लगभग सभी मुस्लिम संगठनों ने इस बात पर जोर दिया कि अनुपात और बढ़ाया जाए। इस पर एतराज हो सकता है कि अब इसके बाद यदि अन्य कोई समुदाय पृथक प्रतिनिधित्व की मांग करता है, तब उसे गैर-मुस्लिम सीटों से कटौती करके ही दिया जा सकता है और हिंदुओं तथा मुसलमानों के विचारों में इस बात की सहमति की संभावना नहीं है कि कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाए। इसलिए हम अपनी पर्याप्त व्याख्या के अनुसार मुसलमानों के लिए पृथक प्रतिनिधित्व बनाए रखने पर अपनी अनुमति सुरक्षित रखते हैं, जबकि हम यह निश्चित न कर लें कि इसका अन्य पर क्या परिणाम होगा। हम योजना बनाने वालों की इस बात से सहमत हैं कि