अल्पसंख्यक एवं प्रतिनिधित्व - Page 362

परिशिष्ट

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उनका निश्चित और अपरिवर्तनीय बहुमत निश्चित हो जाएगा। हम अभी इस हद तक नहीं जा सकते। दोनों समुदायों के बीच कोई और आम सहमति न होने तक इन 6 प्रांतों में समानता पर बंगाल और पंजाब के मौजूदा निर्धारण को मिला कर देखने से बराबरी आ जाएगी।

मुसलमानों को 6 प्रांतों में, जो लाभ प्राप्त है, उन्हें जारी रखना गलत सिद्ध होगा। पंजाब में मुसलमानों को सिखों और हिंदुओं का विरोध होने पर भी बहुमत मिलेगा और बंगाल में तो वे बिना प्रचार ही जीत जाएंगे। दूसरी ओर यदि पारस्परिक सहमति से बंगाल में पृथक निर्वाचन समाप्त भी कर दिया जाए ताकि उस प्रांत में प्रत्येक समुदाय इतनी सीटें पा सकें जितनी कि जो उन्हें संयुक्त चुनाव में चुनाव प्रचार से मिल जाएं, तो उन 6 प्रांतों में जहां मुसलमान अल्पसंख्यक हैं, उन्हें अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखने से वंचित नहीं किया जा सकता था। इसी प्रकार पंजाब में यदि मुसलमान, सिख और हिंदू तीनों समुदाय संयुक्त निर्वाचन के लिए तैयार हो जाते और इस प्रकार मुसलमानों को जो सीटें मिलती उन्हें जोड़कर 6 प्रांतों में उसी अनुपात में सीटें देने पर विचार कर सकते हैं, जितनी उन्हें पृथक निर्वाचन से मिल जातीं।

हमारा यह अंतिम सलाह है, जिसमें वास्तव में दो मांगों में से जो मांग मुसलमान अपने हित में ठीक समझें अपनाएं क्योंकि हम ईमानदारी के तौर पर पृथक निर्वाचन समाप्त करना चाहते हैं और व्यावहारिक रूप में दूसरी ही व्यवस्था चाहते हैं।