क्रिप्स प्रस्ताव - Page 364

परिशिष्ट

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तौर पर हस्ताक्षर हों। इस संधि से ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों के हाथ में पूर्ण सत्ता सौंपने से संबंधित उठने वाली सभी समस्याओं का निदान होगा, वंशानुगत धार्मिक समुदायों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा किए गए वायदों के अनुसार संधि में प्रावधान किया जाएगा परंतु भारतीय संघ की शक्तियों की शर्त में भविष्य में राष्ट्र कुल के अन्य सदस्य देशों के बारे में कोई शर्त नहीं होगी। इस विषय में वह स्वयं फैसला करें।

कोई भारतीय राज्य संविधान को स्वीकार करे या न करे नई परिस्थिति में उससे हुई संधि का पुनरीक्षण करने की आवश्यकता पड़ेगी।

(द) विश्व युद्ध समाप्त होने से पहले प्रमुख समुदायों के भारतीय नेता अन्य किसी प्रकार की व्यवस्था पर जब तक सहमत नहीं हो जाते संविधान निर्मात्री संस्था निम्न प्रकार की होगीःµ

प्रांतीय चुनावों के परिणाम मालूम होने के तुरंत बाद प्रांतीय विधानमंडलों के निचले सदन की पूरी सदस्यता एकल हस्तांतरणीय मतदाता मंडल की प्रणाली से समानुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था द्वारा संविधान निर्मात्री सभा का चुनाव करेगी। इस नई संस्था में सदस्यों की संख्या मतदाता मंडल की संख्या का 1/10 भाग होगी।

भारतीय राज्यों को उनकी संपूर्ण जनसंख्या के अनुपात में अपने प्रतिनिधि भेजने के लिए निमंत्रित किया जाएगा, जैसा कि ब्रिटिश भारत कं संपूर्ण प्रतिनिधि को है और उन्हें वही अधिकार प्राप्त होंगे, जो ब्रिटिश भारतीय सदस्यों को प्राप्त होंगे।

(ई) ऐसे कठिनाई के समय में जैसा कि अभी भारत में है और जब तक कि भारत का नया संविधान नहीं बन जाता, ब्रिटिश सरकार के लिए आवश्यक हो जाता है कि देश के शासन और भारत की सुरक्षा और नियंत्रण रखने के उत्तरदायितव का वहन करें और भारत के सैनिक और भौतिक संस्थानों का उत्तरदायित्व भारतवासियों के सहयोग से भारत सरकार वहन करे और भारत के प्रमुख वर्गों के नेताओं, जो कि सभी काउंसिलों में प्रतिनिधियों के रूप में हैं, उन्हें ब्रिटिश सरकार राष्ट्रकुल और संयुक्त राष्ट्र में भाग लेने के लिए निमंत्रण देती है। इस प्रकार वे भावी स्वतंत्र भारत की मूलभूत आवश्यकताओं तथा समस्याओं को हल करने के योग्य हो सकेंगे।