352 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
दुबारा 23 अपै्रल, 1941 को श्री एमेरी ने संविधान सभा की मांग के संदर्भ में निम्नलिखित बयान जारी कियाःµ
फ्भारत के भावी संविधान का निर्माण ब्रिटिश सरकार द्वारा न करके भारतीयों
को अपने आप करना चाहिए। भारत का भावी संविधान आवश्यक और मूल
रूप से भारतीय संविधान होना चाहिए जो भारतीय स्थितियों और भारत के
लोगों की आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जाना चाहिए। केवल आवश्यक
शर्त यह है कि संविधान अपने आप में और संविधान सभा, जो इसका
निर्माण करे उसमें भारत के राष्ट्रीय जीवन के सभी मुख्य वर्गों की आम
सहमति के लोग हों।य्
संविधान सभा के संबंध में ब्रिटिश सरकार की ओर से ऐसे संकल्प प्रस्तुत किए गए थे, जो अब मान लिए गए हैं। पाकिस्तान की मांग मुस्लिम लीग द्वारा पेश की गई थी। ब्रिटिश सरकार ने उस मांग को भी अस्वीकार कर दिया था। इसके संबंध में लार्ड एमेरी ने हाउस ऑफ कामंस में 1 अगस्त, 1940 को कहा थाःµ
फ्जिसे कांगे्रस राज्य अथवा हिंदू राज्य कहा जाता है, उससे संभावित खतरे
की प्रतिक्रिया में मुसलमानों की ओर से पाकिस्तान की मांग करना हिंदू और
मुस्लिम राज्यों के लिए अलग-अलग राज्य करके भारत को तोड़ना होगा।
मैं आज ऐसी पेचीदा स्थिति पर कुछ नहीं कह सकता। ऐसी योजना पर मेरी
कठोर आपत्तियां हैं और अतिवादी स्वरूप से मैं सहमत नहीं। मेरी टिप्पणी
है कि स्थाई अल्पसंख्यकों की समस्या का हल किए बिना उसे सीमित क्षेत्र
में धकेलना होगा।य्
दुबारा 23 अपै्रल, 1941 को हॉउस आफ कामंस में उन्होंने अपने भाषण में इसका फिर जिक्र किया और निम्नलिखित विचार रखेःµ
फ्मैं अभी तथाकथित पाकिस्तान योजना के मार्ग में आने वाली भारी और
व्यावहारिक कठिनाइयों के विषय में कुछ नहीं कहना चाहता और न भारतीय
इतिहास की 18वीं शताब्दी के दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास की ओर वापस जाने की
आवश्यकता समझता हूं। देशों का दुखद अनुभव आज हमारी आंखों के
सामने है, इसमें भारत की मूलभूत एकता टूटने के भयानक खतरे छिपे हुए
हैं। यह सब होते हुए भी भारत में ब्रिटिश सरकार ने एकता पैदा की जिस
पर हमें गर्व है।य्
संविधान सभा और पाकिस्तान के संबंध में केवल एक वर्ष पहले ब्रिटिश सरकार के ये विचार थे।